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एक लाख के वेतनधारी अधिकारियों को आवंटित कार वापस लेने की मांग

 सरकारी खर्च पर घरेलू उपयोग में गाड़ियों दौड़ाने का आरोप

अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर एक लाख रुपए के वेतनधारी आयकर विभाग के अधिकारियों को आवंटित कारें वापस लेने की मांग की गई है| याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन कारों का विभागीय कार्यों में कम घरेलू कामों में ज्यादा उपयोग किया जा रहा है| जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता सुनील शाह ने एडवोकेट धर्मेश गुर्जर के माध्यम से गुजरात हाईकोर्ट में रिट पिटिशन दाखिल की है| जिसमें कहा गया है कि राज्य में आयकर विभाग के करीब 150 अधिकारी ऐसे हैं जिनकी योग्यता नहीं होने के बावजूद उन्हें कार आवंटित की गई है और कारों के किराए का भुगतान सरकार करती है|

केन्द्र सरकार ने सभी विभाग के डोप्ट के तहत नीति नियम तय किए हैं| जिसके मुताबिक आयकर आयुक्त या उससे वरिष्ठ आयकर विभाग के अधिकारियों को घर से ऑफीस आवा-गमन के लिए कार सुविधा उपलब्ध होती है| इन नियमों के विपरीत आयकर विभाग के आसिस्टन्ट, डिप्टी, जोइन्ट और एडिशनल कमिश्नरों को भी कार की सुविधा मुहैया करवाई गई है| याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमों के विपरीत इन आवंटित कारों का उपयोग अधिकारियों के अलावा उनके परिजन घरेलू उपयोग में करते हैं| जिसमें अधिकारियों की पत्नी इन्हीं कारों में शोपिंग करने जाती है, बच्चों को स्कूल या ट्यूशन छोड़ने या लेने इत्यादि का उपयोग शामिल है और सरकार प्रति वर्ष लाखों रुपए किराया भुगतान करती है| सामान्य पेट्रोल एलाउन्स के बजाए ऐसे अधिकारियों पर बतौर किराया रु. 40 से रु. 60 हजार का खर्च किया जाता है|

जिससे प्रति माह रु. 60 लाख और साल भर में सवा सात करोड़ रुपए का बोज सरकारी खजाने पर पड़ता है| याचिका में कहा गया है कि ऐसे अधिकारियों का वेतन एक लाख रुपए है और उनके वेतन की 40 प्रतिशत रकम बतौर कार के किराए स्वरूप दी जाती है| वास्तव में ऐसे अधिकारियों को उनके वेतन का 10 प्रतिशत पेट्रोल एन्लाउन्स दिया जाना चाहिए| सरकार ऐसे अधिकारियों को गैर जरूरी और अनुचित सुविधाएं देकर रुपए और सत्ता का दुरुपयोग कर रही है| याचिका में मांग की गई है कि इस प्रकार सरकारी सुविधा का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए|

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