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पटेल को रोकने की कोशिश बेकार, शाह ने चुनाव पर गड़ाईं नजरें

नई दिल्ली । अनेक संकटों को पार करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल आखिरकार राज्यसभा पहुंच गए। उनकी जीत, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह के लिए निजी झटके की तरह है, क्योंकि पटेल का रास्ता रोकने के लिए उन्होंने हर मुमकिन कोशिश की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह की इस तात्कालिक ‘हार’ का भाजपा की भविष्य की योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। गुजरात में अगले दिनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अमित शाह ने इस पराजय से उबरते हुए अब विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित कर लिया है।

भाजपा संगठन का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में भले ही वैसी टूट नहीं हो पाई हो, जैसी कि उम्मीद की जा रही थी, लेकिन भाजपा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने संकट तो खड़ा कर ही दिया। कांग्रेस के बागी शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस में भले ही ज्यादा बड़ी टूट करा पाने में असफल रहे हों, लेकिन अगले दिनों में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनके पास एक और मौका होगा।

शाह उन पारंपरिक राजनेताओं से जरा अलग हैं, जो आम तौर पर विपक्षी पार्टियों के बड़े नेताओं को आसानी से चुनाव जीतने देते हैं। उनकी रणनीति हमेशा बड़े नेताओं को तोड़ने की होती है। 2014 में शाह ही वह शख्स थे, जिन्होंने अमेठी लोकसभा सीट पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ स्मृति इरानी को उतारने का प्रस्ताव रखा था। स्मृति ने पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के खिलाफ जिस तरह से प्रदर्शन किया, उससे कांग्रेस में भी चिंता की लकीरें खिंच गई थीं। भाजपा अध्यक्ष शाह अब राज्यसभा सदस्य के तौर पर नई पारी शुरू करने वाले हैं। अध्यक्ष बनने के बाद के तीन सालों से उन्होंने संगठन पर पकड़ मजबूत कर ली है।

लोगों का मानना है कि शाह संसद में रह पार्टी संगठन को ज्यादा बेहतर तरीके से संचालित कर पाएंगे। शाह अब ज्यादा आजाद होकर फैसले लेंगे और नए चेहरों को भी सामने ला सकते हैं। अगले दिनों में गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव में एक बार फिर उनकी रणनीतिक कौशल की परीक्षा होगी। दिसंबर में हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव होने हैं। राज्य में सत्ता विरोधी लहर के सहारे शाह को उम्मीद है कि वह वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को हराने में कामयाब होगे। इसके बाद, 2018 की शुरुआत में कर्नाटक, फिर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों की चुनौती है। राज्यसभा चुनाव में मिले तनाव के उबरते हुए अमित शाह अब राज्य विधानसभा चुनावों की रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।

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