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राम जन्मभूमि विवाद- सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई ५ दिसंबर को 

नई दिल्ली (ईएमएस)। अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के दस्तावेज और मौखिक गवाहियों का १२ हफ्ते में अनुवाद करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट मे रामलला की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथ पेश हुए। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को सूचना के लिए ४ हफ्ते मे हिन्दी अंग्रेज़ी के अखबार मे नोटिस निकालने का आदेश दिया है। कोर्ट ने नियमित सुनवाई के लिए ५ दिसंबर की तारीख पर तय कर दी है। सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्माेही अखाड़ा ने सुनवाई के लिए ५ दिसंबर की तारीख का विरोध किया है। दोनों पक्षों ने कहा है कि अभी केस की सुनवाई के लिए तैयार नहीं है। वहीं योगी सरकार ने भी सुनवाई की तारीख का विरोध करते हुए कहा कि पहले अपीलों को सुना जाना चाहिए। जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले अपीलों पर सुनवाई होगी और फिर अंतरिम अर्जियों पर विचार। अब मामले में सबसे पहले भगवान रामलला विराजमान की ओर से अपनी अपील पर बहस की जाएगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने ३० सितंबर २०१० को २-१ के बहुमत से फैसला सुनाते हुए राम जन्मभूमि को ३ बराबर हिस्सों में रामलला विराजमान,निर्माेही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड मे बांटने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ९ मई २०११ को अपीलें विचारार्थ स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी और सभी पक्षों को यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिए थे जो फिलहाल लागू हैं। इसीलिए रामलला का तिरपाल भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बदला जाता है। शिया बोर्ड ने नयी याचिका दाखिल कर ढहाए गए विवादित ढांचे को शिया वक्फ बताया है। उसने बाबरी ढांचे को शिया वक्फ घोषित करने से इन्कार करने के फैजाबाद जिला अदालत के १९४६ के फैसले को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी है। ये याचिका भी शुक्रवार को सुनवाई पर लगी है। याचिका में कहा कि उसका वाद खारिज करने का जिला कोर्ट का आदेश गलत है।

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