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मौत की सजा देने में चीन सबसे आगे, बाद में ईरान और सऊदी अरब का नंबर

दुनिया भर में 37 फीसदी तक कमी आई
पेइचिंग।अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनिस्टी इंटरनेशनल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 के दौरान दुनियाभर में सजा-ए-मौत के मामलों में 37 फीसदी तक की कमी आई। एक ओर जहां 2015 के मुकाबले 2016 में फांसी के मामलों में 37 प्रतिशत तक की कमी आई, वहीं चीन ने दुनिया के बाकी सभी देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को मौत की सजा दी। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के बाकी सभी देशों को मिलाकर फांसी के जितने मामले हुए, उनसे ज्यादा लोगों को चीन ने अकेले ही फांसी दी। ईरान में मौत की सजा दिए जाने के चलन में थोड़ी कमी देखी गई। ऐमनिस्टी इंटरनेशनल ने मंगलवार को मौत की सजा पर 2016 के लिए अपनी वैश्विक समीक्षा रिपोर्ट जारी की। दुनिया में इसका प्रतिशत गिरा है और इसका सबसे बड़ा कारण यह रहा कि ईरान ने पिछले साल कम लोगों को यह सजा दी। चीन के बारे में स्पष्ट आंकड़े हासिल करना काफी मुश्किल है। कई मामलों को तो पेइचिंग इतना गुप्त रखता है कि उनसे जुड़ी कोई जानकारी बाहर नहीं आती। फांसी के मामलों से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां चीन में ’स्टेट सीक्रिट्स’ रखी जाती हैं। माना जाता है कि चीन में हर साल हजार से भी ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है। ऐमनिस्टी इंटरनैशनल के सेक्रटरी जनरल सलिल शेट्टी ने कहा,चीन वैश्विक मंच पर लीडर बनना चाहता है,लेकिन जब बात फांसी की सजा की होती है, तो यह सबसे बुरी हालत में है। चीन में हर साल दुनिया के किसी भी और देश के मुकाबले सबसे ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है।’
सलिल ने आगे कहा, ’चीन की सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि स्पष्टता और न्यायिक पारदर्शिता के मामले में वह धीमा है, लेकिन इसके बावजूद वहां इतने बड़े स्तर पर फांसी की सजा दी जाती है। अब समय आ गया है कि चीन अपने इन खूनी रहस्यों से पर्दा उठाए और फांसी की सजा पर अपना रेकॉर्ड सुधारे।’ चीन के आंकड़ों को हटा दें, तो 2016 में दुनिया भर में करीब 1,032 लोगों को फांसी की सजा हुई। इनमें से सबसे ज्यादा, यानी करीब 856 फांसियां मध्यपूर्वी और उत्तरी अफ्रीका के देशों में हुईं। अमेरिका के अंदर पिछले साल फांसी की सजा के मामले ऐतिहासिक रूप से सबसे कम पाए गए। पिछले एक दशक में पहली बार अमेरिका फांसी देने के मामले में दुनिया के सबसे टॉप 5 देशों में शामिल नहीं था। इससे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को आगे के लिए काफी उम्मीद दिख रही है। 2016 में अमेरिका ने करीब 20 लोगों को मौत की सजा दी, लेकिन इनमें से ज्यादातर को फांसी पर चढ़ाकर नहीं, बल्कि जहरीला इंजेक्शन देकर मारा गया। अमेरिका में अभी भी 2,832 अपराधी ऐसे हैं, जिन्हें मौत की सजा दिए जाने पर अदालत की मुहर लग चुकी है।
ईरान ने 2016 में करीब 567 लोगों को मौत की सजा दी। सऊदी अरब ने 154 लोगों को फांसी पर चढ़ाया। 2015 में उसका आंकड़ा 158 था। ईजिप्ट में यह आंकड़ा 2015 के मुकाबले लगभग दोगुना हो गया। 2015 में यहां 22 लोगों को फांसी की सजा दी गई थी और पिछले साल यह संख्या बढ़कर 44 हो गई। इराक में 88 से ज्यादा ऐसे मामले हुए। पाकिस्तान में 87 से ज्यादा को फांसी दी गई। सोमालिया में 28, सिंगापुर में 4, सूडान में 2, ताइवान में 1, जापान में 3, मलयेशिया में 9, नाइजीरिया में 3, अफगानिस्तान में 6, बांग्लादेश में 10, बेलारूस में 4 और इंडोनेशिया में भी 4 लोगों को फांसी दी गई। 2015 के मुकाबले पाकिस्तान के अंदर इन मामलों में 73 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

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