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वाहन उद्योग के लिए मिला जुला रहा साल

– कर, कानून और नीति परिवर्तन के लिए बेहतर रहा 2016
मुंबई। साल २०१६ भारतीय वाहन उद्योग के लिए मिलाजुला साल रहा और कर, कानून, नीति में परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद इस उद्योग की विकास दर अच्छी रही। सियाम के आंकड़े और वाहन बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि २०१६ का साल निाqश्चत रूप से वाहन उद्योग के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल रहा। सामान्य और लक्जरी वाहनों के साथ साथ इस साल वाहन उद्योग को ‘इंप्रâा सेस’ और ‘लक्जरी टैक्स’ की चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
वाहन बाजार के कारोबारियों के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उच्च क्षमता वाले डीजल इंजन की कारों पर दिल्ली में लगाए गए (अब हटा लिया गया है) प्रतिबंध से २०१५ से इस खंड में आई तेजी को नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि वंâपनी के राजस्व का २० से २५ फीसदी हिस्सा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से ही प्राप्त होता है। २०१६ को वाहन उद्योग के लिए बेहतर साल बताते हुए निशान इंडिया ऑपरेशंस के अध्यक्ष गुईलम सिकार्ड ने कहा कि साल के अंत में जरूर कुछ अप्रत्याशित घट गया। वैश्विक बिक्री काफी अच्छी रही और भारत में पिछले साल की तुलना में वाहन उद्योग में १० फीसदी की तेजी आई। लेकिन नवंबर के अंत में कुछ अनिाqश्चताएं देखने को मिली, क्योंकि नोटबंदी के कारण अल्पकालिक रूप से अनिाqश्चतता का माहौल रहा।
वाहन बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी के कारण अल्पकालिक स्तर पर वाहन उद्योग पर असर तो पड़ेगा ही, क्योंकि लोग वाहन खरीदने के पैâसले को टाल रहे हैं। वहीं, दोपहिया वाहन उद्योग में इस साल अच्छी तेजी देखने को मिली। हालांकि साल के अंत में नोटबंदी के कारण बिक्री प्रभावित हुई। िंफच की रेिंटग के मुताबिक, नोटबंदी से दोपहिया वाहनों की बिक्री पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं होगा।
वाणिाqज्यक वाहनों के क्षेत्र में २०१६ की पहली छमाही इसमें सभी खंडों के लिए बेहतर रही। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार अप्रैल २०१७ से बीएस-४ उत्सर्जन मानक लागू कर रही है, जिससे लघु अवधि में मार्च २०१७ तक मांग बढ़ने की संभावना है। जीएसटी के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा संभावना है कि वाणिाqज्यक वाहनों के लिए कर की दर २८ फीसदी होगी, इससे वाहन की लागत २ से ३ फीसदी कम होगी।
प्रदीप/२५दिसम्बर/२०१६

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