सूरत : मंदी से जूझ रहे हजारों हीरा श्रमिकों को टेक्सटाइल इंडस्ट्री देगी सहारा

हीरा उद्योग में मंदी, कपड़ा उद्योग में दो लाख श्रमिकों की जरूरत; बिना ट्रेनिंग भी 30 हजार तक वेतन संभव

सूरत : मंदी से जूझ रहे हजारों हीरा श्रमिकों को टेक्सटाइल इंडस्ट्री देगी सहारा

सूरत। औद्योगिक शहर सूरत में हीरा और कपड़ा उद्योग सबसे बड़े रोजगार प्रदाता हैं। हीरा उद्योग में जारी मंदी के कारण लगभग 50 हजार श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं, जबकि कपड़ा उद्योग में दो लाख श्रमिकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में यदि हीरा श्रमिक कपड़ा उद्योग की ओर रुख करते हैं, तो दोनों उद्योगों को राहत मिलेगी। हीरे की घिसाई कर जहां श्रमिक 15-20 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रहे थे, वहीं कपड़ा उद्योग में 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक की आमदनी संभव है।

सूरत के कपड़ा उद्योग में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 10 से 12 लाख लोग कार्यरत हैं, जबकि हीरा उद्योग में 8 से 10 लाख लोग कार्य करते हैं। औद्योगिक क्षेत्र में मंदी और तेजी का प्रभाव स्वाभाविक है, लेकिन मौजूदा हालात में हीरा उद्योग में मंदी से श्रमिकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, कपड़ा उद्योग में करघे, जॉब वर्क, कढ़ाई और रंगाई-छपाई मिलों में मजदूरों की भारी कमी है।

 सूरत बुनकर संघ के अध्यक्ष विजय मंगूकिया के अनुसार, हीरा उद्योग में लंबे समय से जारी मंदी को देखते हुए टेक्सटाइल इंडस्ट्री हीरा श्रमिकों का स्वागत करने के लिए तैयार है। कपड़ा उद्योग में बिना किसी विशेष प्रशिक्षण के भी 15-20 दिन में श्रमिक काम सीख सकते हैं और आसानी से 25-30 हजार रुपये प्रतिमाह कमा सकते हैं।

मंगूकिया ने सरकार से अपील की कि कपड़ा उद्योग में कुशल श्रमिकों को तैयार करने के लिए प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए जाएं। इससे हीरा श्रमिकों को रोजगार मिलेगा और उद्योग को भी लाभ होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि गृहणियों के लिए भी प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं, ताकि वे भी इस उद्योग से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

हालांकि, हीरा श्रमिक संघ के उपाध्यक्ष भावेश टांक ने कहा कि लंबे समय से एक ही पेशे में काम कर रहे श्रमिकों के लिए नया काम सीखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कपड़ा उद्योग में श्रम कानूनों का पालन सही ढंग से किया जाता है।

वहीं, हीरा श्रमिक ऋत्विक शियानी ने कहा कि हीरा उद्योग में वर्षों से सीखा गया कौशल किसी अन्य उद्योग में उपयोगी नहीं हो सकता। हालांकि, मौजूदा मंदी के दौर में नए विकल्पों की तलाश करना श्रमिकों के लिए जरूरी हो गया है।

हीरा उद्योग में मंदी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बढ़ती श्रमिकों की मांग के चलते हीरा श्रमिकों के लिए कपड़ा उद्योग एक बेहतर अवसर बन सकता है। उद्योग जगत और सरकार मिलकर यदि इस दिशा में प्रयास करें, तो न केवल बेरोजगार श्रमिकों को राहत मिलेगी, बल्कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेगी।

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