सूरत : महाकुंभ सिर्फ आस्था नहीं, भारत की आत्मा को जोड़ने वाला महासंगम : अरविंद सिंह
महाकुंभ भारतीय संस्कृति और आस्था का महापर्व, इस बार की व्यवस्थाएँ अतुलनीय
हिंदीभाषी महासंघ के महासचिव और भाजपा नेता अरविंद सिंह ने अपने परिवार संग महाकुंभ में पवित्र संगम स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कुंभ मेले में की गई प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि “महाकुंभ भारतीय संस्कृति और आस्था का महापर्व है और इस बार की व्यवस्थाएँ अतुलनीय हैं। स्वच्छता, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के लिए किए गए प्रबंध प्रशंसनीय हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार ने इस आयोजन को भव्य एवं दिव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
संगम तट पर स्नान के बाद श्री सिंह ने कहा, “गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाकर आत्मिक शांति और पुण्य की अनुभूति होती है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समुचित प्रबंध किए हैं, जिससे हमें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। स्नान घाटों की स्वच्छता और सुरक्षा इंतज़ामों ने सभी को प्रभावित किया है।”
इसके अलावा, श्री सिंह ने अपनी पत्नी के साथ श्री बड़े हनुमानजी मंदिर का भी दौरा किया। यह एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमान जी लेटे हुए मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 20 फीट लम्बी है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए अति श्रद्धा का केंद्र और दर्शनीय स्थल है।
उन्होंने कुंभ मेला क्षेत्र में किए गए डिजिटल नवाचारों और यातायात प्रबंधन की भी सराहना की। “इस बार की कुंभ व्यवस्था अनुकरणीय है। जगह-जगह सूचना केंद्र, सार्वजनिक संबोधन प्रणाली, और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए की गई डिजिटल पहल अत्यंत सराहनीय हैं। कुंभ मेला क्षेत्र में कहीं भी अव्यवस्था नहीं दिखी, जो प्रशासन की तत्परता को दर्शाता है।
श्री सिंह ने विशेष रूप से पुलिस और सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि “सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतज़ामों के चलते यह भव्य आयोजन पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित दिख रहा है। प्रशासन की मेहनत रंग लाई है और हर श्रद्धालु को दिव्य कुंभ का अनुभव मिल रहा है।” उन्होंने अन्य श्रद्धालुओं से भी आह्वान किया कि वे कुंभ में आकर आस्था की इस अनूठी अनुभूति का हिस्सा बनें।
श्री सिंह ने कहा कि “नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों की वाहक हैं। गंगा, यमुना और सरस्वती न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे पूरे भारत को एकसूत्र में पिरोने का कार्य भी करती हैं। कुंभ मेले में अब तक 53 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र स्नान कर चुके हैं, जो इसकी व्यापकता और आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाता है।
सनातन धर्म के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि “कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा का साक्षी है। यह आयोजन हमारी आध्यात्मिक जड़ों को मजबूत करता है और पूरे देश को एक आध्यात्मिक सूत्र में बाँधता है। यह पर्व आत्मशुद्धि, समाज सेवा और भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रदर्शित करने का सबसे बड़ा अवसर है।”
श्री सिंह के इस दौरे के दौरान उनके परिवार के सदस्य भी साथ रहे, जिन्होंने संगम स्नान के बाद पूजन-अर्चन कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। महाकुंभ के इस दिव्य आयोजन में शामिल होकर श्री सिंह ने इसे भारतीय संस्कृति का गौरव बताया और इसके सफल आयोजन के लिए सरकार एवं प्रशासन को बधाई दी।