Widgetized Section

Go to Admin » Appearance » Widgets » and move Gabfire Widget: Social into that MastheadOverlay zone

महत्वपूर्ण लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए निकाली जाती थी कॉल डिटेल 

मुंबई (ईएमएस)। कॉल डिटेल लीक कांड की जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि वीवीआईपी नंबरों की भी कॉल डिटेल निकाली जा रही थी। पुलिस को आशंका है कि कॉल डिटेल निकाल कर वीवीआईपी लोगों को ब्लैकमेल किया जा रहा था। कुछ बीमा कंपनियों पर भी लोगों की कॉल डिटेल को गैरकानूनी तरीके से निकलवाने का आरोप है। ठाणे से देश की पहली महिला जासूस रजनी पंडित की गिरफ्तारी के बाद से रोज नए खुलासे हो रहे है। पुलिस को शक है कि कॉल डिटेल लीक करके ये रैकेट सिर्फ बीमा कंपनियों की मदद या पार्टनर के संबंधों की पड़ताल के लिए नहीं था, बल्कि यह ब्लैकमेलिंग का धंधा बन गया था। पुलिस को जांच में 16 वीआईपी नंबर मिले हैं, जिनका सीडीआर यानी कॉल डीटेल रिकॉर्ड निकलवाया गया। लैपटॉप और मोबाईल के डाटा के आधार पर सीडीआर मांगने वालों की जांच की जा रही है। ऑफिशियल मेल की भी जांच की जा रही है। इस मामले में कई आरोपी वांछित हैं और अब तक जो डाटा मिला है उसके आधार पर आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। वीआईपी नंबरों की भी जांच की जा रही है। आरोपियों की चैट और सीडीआर मांगने वालों की जांच की जा रही है।

इस मामले का खुलासा तब हुआ था, जब ठाणे में एक जासूस को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद चार और जासूसों की गिरफ्तारी हुई। इसी के बाद देश की पहली महिला जासूस रजनी पंडित को गिरफ्तार किया गया। इन लोगों के कब्जे से 177 सीडीआर बरामद किए गए। पुलिस ने जांच में पाया है कि इन्होंने वोडाफोन, एयरटेल, एयरसेल, आइडिया, टाटा, जियो और यूनिनॉर जैसी बड़ी कंपनियों के ग्राहकों के काल डेटा रिकार्ड यानी सीडीआर चुराए हैं। पुलिस ने इन सातों दूर संचार सेवा प्रदाता कंपनियों से पूछताछ शुरू कर दी है।

अक्सर पारिवारिक झगड़ों की स्थिति में लोग कॉल डीटेल निकलवाते हैं। इसके अलावा मैट्रीमोनियल वेबसाइट पर शादी तय होने के बाद लोग अपने होने वाले साथी की जांच-पड़ताल के लिए भी इसका उपयोग करते हैं। सबसे बड़ा खेल करती थीं बीमा कंपनियां जो दावे की जांच के लिए सीडीआर हासिल करती थीं। इस गोरखधंधे में शामिल बीमा कंपनियों में आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, एचडीएफसी एर्गो, रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस और कोटक महिंद्रा शामिल हैं। पुलिस ने इन चारों बीमा कंपनियों के अधिकारियों के बयान लिए हैं। पुलिस ने इंश्योरेंस कंपनियों के अधिकारियों से उन मामलों के भी डिटेल मांगे है, जिनके लिए ये सीडीआर लिए गए थे।

यह समझना बहुत जरूरी है कि मोबाइल सीडीआर का लीक होना खतरनाक क्यों है। आप फोन पर बात करते हैं। मोबाइल कंपनियों के पास इसका डाटा तैयार होता रहता है। यह डाटा हर दिन, हर घंटे, हर मिनट का होता है, जिसमें आपकी लोकेशन से लेकर आप किससे बात कर रहे हैं जैसी बातें शामिल होती हैं। यह निजी जानकारी सीडीआर के रूप में होती है, जिसे खरीदना और बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी है। इससे किसी को उस हद तक नुकसान पहुंचाया जा सकता है, जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती है।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.