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चीन के महत्वाकांक्षी सिल्क रोड प्रॉजेक्ट को झटका

राह में राजनीतिक और वित्तीय बाधाएं

बीजिंग (ईएमएस)। रेल लाइन, बंदरगाह और दूसरी सुविधाओं के जरिए एशिया को यूरोप से जोड़ने के लिए चीन के आधुनिक सिल्क रोड की योजना को पाकिस्तान में कई अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि चीन के साथ पाकिस्तान के रिश्ते इतने प्रगाढ़ हैं कि पाकिस्तानी अधिकारी उसे अपना आयरन ब्रदर कहते हैं। इसके बाद भी डेमर-भाषा डैम प्रॉजेक्ट के लिए चीनी मदद के प्रस्ताव को नवंबर में पाकिस्तान के वॉटर अथॉरिटी के चेयरमैन ने यह कहकर ठुकरा दिया था कि बीजिंग इस प्रॉजेक्ट का मालिकाना हक चाहता है। उन्होंने इसे पाकिस्तानी हितों के खिलाफ बताकर खारिज कर दिया। पाकिस्तान डेमर-भाषा डैम के लिए 14 अरब डॉलर की चीनी मदद की पेशकश को ठुकरा चुका है। चीन ने डेमर-भाषा प्रॉजेक्ट पर उसकी मदद को ठुकराए जाने की रिपोर्ट्स का खंडन किया था, लेकिन बाद में अधिकारियों ने इस डैम को उन दर्जनों प्रॉजेक्ट्स की लिस्ट से बाहर कर दिया, जिन्हें दोनों देश साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड’ इनिशिएटिव के तहत प्रॉजेक्ट्स को पाकिस्तान से लेकर तंजानिया और हंगरी तक झटकों का सामना करना पड़ रहा है। ये प्रॉजेक्ट्स रद्द हो रहे हैं या उन पर नए सिरे से बातचीत हो रही है। कुछ प्रॉजेक्ट्स में लागत को लेकर विवाद की वजह से देरी हो रही है, तो कुछ मामलों में मेजबान देश यह शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें प्रॉजेक्ट्स से चीन के मुकाबले बहुत कम हासिल हो रहा है। प्रॉजेक्ट्स को चीनी कंपनियां बना रही हैं और इसके लिए बीजिंग कर्ज दे रहा है, लेकिन मेजबान देश को उस कर्ज को चुकाना पड़ेगा। हॉन्ग कॉन्ग की रिसर्च फर्म इकोनॉमिस्ट कॉर्पोरेट नेटवर्क में एनालिस्ट रॉबर्ट कोएप कहते हैं, पाकिस्तान उन देशों में है, जिन्हें चीन की जेब में माना जाता है और यही पाकिस्तान जब पलटकर कहे कि मैं आपके साथ इसे नहीं करूंगा, तो यह दिखाता है कि ये प्रॉजेक्ट्स चीन के साथ-साथ संबंधित देशों के लिए ‘विन-विन’ जैसे नहीं हैं, जैसा कि चीन दावा करता है। शी ने 2013 में ‘बेल्ट एंड रोड’ का एलान किया था और इसे मोटे तौर पर परिभाषित करते हुए बताया था कि यह दक्षिण प्रशांत से लेकर एशिया, अफ्रीका और यूरोप के 65 देशों में चीन द्वारा निर्मित या वित्तपोषित प्रॉजेक्ट्स की एक छतरी है। ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रॉजेक्ट का जब चीन ने एलान किया था, तो तमाम देशों ने इसका स्वागत किया था। लेकिन अब वॉशिंगटन से लेकर मॉस्को और नई दिल्ली की सरकारें बेल्ट एंड रोड को लेकर सशंकित है। इनके मुताबिक बीजिंग ‘बेल्ट एंड रोड’ का इस्तेमाल चीन-केंद्रित राजनीतिक ढांचे को बनाने की कोशिश के तौर पर कर रहा है। बेल्ट एंड रोड के तहत आने वाले जिन प्रॉजेक्ट्स पर ग्रहण लगा है, उनमें नेपाल का भी एक हाइड्रो प्रॉजेक्ट शामिल है। पिछले साल नवंबर में नेपाल ने चीनी कंपनियों द्वारा 2.5 अरब डॉलर के डैम प्रॉजेक्ट को बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। नेपाल ने कहा था कि बूढ़ी गंडकी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट के ठेकों में नियमों का उल्लंघन हुआ है। कंसल्टिंग फर्म बीएमआई रिसर्च के मुताबिक एशिया, अफ्रीका और मिडल ईस्ट में करीब 1.8 खरब डॉलर के इन्फ्रस्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स में या तो चीन का पैसा लगा है या वह किसी अन्य तरीके से उनमें शामिल है।

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