सूरत : अमेरिकी टैरिफ बढ़ने पर शहर के व्यापार जगत की प्रतिक्रिया
रत्न एवं आभूषण और वस्त्र उद्योग के लिए टैरिफ पर सब्सिडी की मांग
सूरत। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 27 प्रतिशत 'रियायती पारस्परिक टैरिफ' लगाने की घोषणा के बाद, दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से रत्न एवं आभूषण तथा वस्त्र उद्योग के लिए टैरिफ पर सब्सिडी प्रदान करने का अनुरोध किया है।
अमेरिका ने हाल ही में 2 अप्रैल, 2025 से टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। इससे पहले भारत से अमेरिका को 87.4 बिलियन डॉलर का निर्यात होता था, जिसमें से रत्न एवं आभूषण उद्योग 2.72 लाख करोड़ रुपये का योगदान देता है, जबकि भारत के कुल वस्त्र निर्यात का 28 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका जाता है।
एसजीसीसीआई के अध्यक्ष विजय मेवावाला ने कहा कि दक्षिण गुजरात रत्न एवं आभूषण और वस्त्र उद्योग का प्रमुख केंद्र है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का इन उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और इससे हजारों नौकरियों पर भी असर हो सकता है। इस स्थिति को देखते हुए, चैंबर ने सरकार से इन उद्योगों को टैरिफ पर तत्काल सब्सिडी देने और अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को प्राथमिकता देने की अपील की है।
भारत सरकार ने रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, आईटी, फार्मास्यूटिकल और सौर मॉड्यूल जैसे क्षेत्रों में तत्काल मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए)की पेशकश की है। वहीं, अमेरिका उन्नत विनिर्माण, रोबोटिक्स, ऑटोमोबाइल और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में एफटीए चाहता है।
अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बनती है, तो इससे भारत के निर्यातकों को राहत मिल सकती है और व्यापार संतुलन बना रह सकता है। चैंबर ने भी इस दिशा में सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है ताकि भारत के प्रमुख उद्योगों को नुकसान से बचाया जा सके।
अमेरिकी टैरिफ का सूरत के कपड़ा उद्योग पर बहुत कम असर होगा : प्रमोद चौधरी
विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माने जाने वाले अमेरिका द्वारा टैरिफ़ लगाए है। भारत से जो भी अमेरिका में इम्पोर्ट होगा उस पर 27 प्रतिशत टेक्स लगेगा। अमेरिका के टेरिफ से सूरत का कपड़ा उद्योग भी थोडा प्रभावित होगा। जहा तक सूरत से अमेरिका में कपड़े का डायरेक्ट एक्सपोर्ट बहुत कम है। सूरत में कपड़े का प्रोडक्शन डोमेस्टीक मार्केट के लिए बनता है। मुश्किल से 2 से 3 प्रतिशत सूरत का कपडा एक्सपोर्ट होता है। उसमें भी ज्यादातर अमेरिका के अलवा दुसरे देशों में भी एक्सपोर्ट होता है। अमेरिका युरोप के देशों के लिए जो गार्मेन्टींग होती है उसमें सूरत का कपड़ा बांग्लादेश,वियतनाम, टर्की, दक्षिण अमेरिका के कुछ देशो में एक्सपोर्ट होता है। कुछ देशों में अमेरिका ने टेरिफ न्युट्रीलाईज किया है कुछ देशों में बढ़ाया है। सूरत के कपड़ा उद्योग को बहुत ज्यात असर नही होगी।
सूरत से गार्मेन्ट और होम फर्निशिंग के कपड़े पर वितरीत असर होगी : कैलास हाकिम
फोस्टा अध्यक्ष कैलास हाकिम ने बताया कि अमेरिका का जो टेरिफ लागु होने जा रहा है। एफटीएफ में 7 प्रतिशत टेरिफ था जो 27 प्रतिशत टेरिफ हो जायेगा। सूरत से जो ज्यादातर कपड़ा एक्सपोर्ट होता है उसमें गार्मेन्ट और होम फर्निशिंग का कपडा एक्सपोर्ट होता है। टेक्स लागु होने से इतना महंगा कपड़ा एक्पोर्ट होगा तो उसका विपरित आसर दिखेगा। अमेरिका सरकार बार बार कई कानून चेंज कर रही है। इसके पिछे शायद उनका यह मकसद हो सकता है कि अपने घरेलू इंडस्ट्री को डेवलोप करने का होगा। या अलग कोई रणनिति हो सकती है। खास कर हमारे सूरत से जो कपडा एक्सपोर्ट होता है उस पर विपरित असर पडेगी।