सूरत : सूरत में गूंजा बिहार दिवस, राजस्व मंत्री संजय सरावगी ने कहा – गुजरात और बिहार का नाता पुराना

हजारों की भीड़ में मना बिहार दिवस, गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भी रहे मौजूद

सूरत : सूरत में गूंजा बिहार दिवस, राजस्व मंत्री संजय सरावगी ने कहा – गुजरात और बिहार का नाता पुराना

 बिहार फाउंडेशन, गुजरात चैप्टर द्वारा 24 मार्च को संजीव कुमार ऑडिटोरियम, पाल सूरत में भव्य रूप से बिहार दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गुजरात सरकार के गृह मंत्री हर्ष संघवी, सूरत शहर के भाजपा महामंत्री किशोर बिंदल, कॉर्पोरेटर रीना अजित सिंह, बिहार भाजपा के उपाध्यक्ष सरोज रंजन पटेल, बिहार सरकार के उद्योग विभाग के टेक्निकल एक्सपर्ट रजनीकांत कुमार और सूरत पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत सहित अन्य गणमान्य लोग भी शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर मंत्री संजय सरावगी ने कहा कि बिहार के लोग देश के विभिन्न राज्यों में रहते हैं, लेकिन सूरत में हर वर्ग के लोग बसे हैं—व्यापारी, उद्योगपति, मध्यमवर्ग, मजदूर वर्ग और बड़ी संख्या में प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत लोग भी। उन्होंने बिहार के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देने के लिए सभी बिहारवासियों से एकजुट होने की अपील की।

अपने संबोधन में मंत्री सरावगी ने कहा कि बिहार अब पहले जैसा नहीं रहा। उन्होंने कहा, "एक समय था जब बिहार में उद्योगों की भरमार थी, लेकिन लालू के शासनकाल में केवल अपहरण का उद्योग फला-फूला, जिससे उद्यमी बिहार छोड़कर चले गए। 2005 से पहले बिहार में प्रति व्यक्ति आय मात्र 7,900 रुपये थी, जो अब बढ़कर 66,000 रुपये से अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में बिहार के लिए बजट में विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे राज्य के विकास को और गति मिलेगी।

उन्होंने आगे बताया कि बिहार में माता सीता के भव्य मंदिर के लिए भूमि आवंटित की गई है और इसे अयोध्या में श्रीराम मंदिर की तर्ज पर बनाया जाएगा।

 कार्यक्रम के दौरान बिहार फाउंडेशन के सचिव धर्मेश सिंह ने बिहार की प्रगति और विकास योजनाओं पर जानकारी दी, जबकि के.के. शर्मा ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

 कार्यक्रम के समापन पर लोगों ने पारंपरिक बिहारी व्यंजन लिट्टी-चोखा का स्वाद लिया, जिससे बिहार दिवस का उत्सव और भी यादगार बन गया।

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