सोना क्यों बनता जा रहा है दुनिया की आर्थिक सुरक्षा का आधार?
दुनिया भर में आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एक समय अमेरिकी डॉलर को सबसे मजबूत और भरोसेमंद मुद्रा माना जाता था, लेकिन अब कई देशों का उस पर विश्वास कम होता दिख रहा है। ऐसे में सोना एक बार फिर वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
पिछले एक साल (अप्रैल 2024 से अप्रैल 2025) में अमेरिकी डॉलर की सोने के मुकाबले खरीदने की क्षमता में करीब 25% से भी अधिक की कमी आई है, जैसा कि कुछ विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषणों का दावा है। इसका मतलब है कि एक साल पहले की तुलना में आज डॉलर से कम सोना खरीदा जा सकता है। हालांकि यह आंकड़ा पूरी तरह पुष्ट नहीं हुआ है, लेकिन सोने की कीमतों में 2024 के दौरान 25% से अधिक की वृद्धि और 2025 में भी तेजी का रुझान इस दिशा में इशारा करता है। इसका असर आम लोगों पर भी पड़ता है—मुद्रा की कमजोरी से महंगाई बढ़ती है और निवेश के विकल्प जोखिम भरे हो जाते हैं।
दुनियाभर के केंद्रीय बैंक, जैसे भारत का रिजर्व बैंक (RBI), चीन का पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) और अन्य, बड़े पैमाने पर सोने का भंडारण कर रहे हैं। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के अनुसार, 2024 में केंद्रीय बैंकों ने 1,045 टन सोना खरीदा, जो पिछले दो वर्षों की तरह ही रिकॉर्ड स्तर पर रहा। 2025 में भी यह सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि देश अब कागजी मुद्रा (फिएट करेंसी) से ज्यादा सोने जैसी ठोस संपत्ति पर भरोसा कर रहे हैं।
हाल ही में जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने अमेरिकी आयात शुल्क (टैरिफ) के खिलाफ एकजुटता दिखाने की बात कही है। ये वही देश हैं जो अमेरिकी बॉन्ड्स के सबसे बड़े खरीदार रहे हैं। अगर ये देश भी अब सोने की ओर रुख कर रहे हैं, तो यह अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व के लिए एक चेतावनी संकेत है।
यूरोप में भी यह सोच बढ़ रही है कि केवल डॉलर और पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं पर निर्भरता अब सुरक्षित नहीं। इसीलिए खनिज संपत्तियों—जैसे लिथियम, कोबाल्ट और सबसे अहम, सोना—की मांग तेजी से बढ़ रही है। ये संसाधन भविष्य की आर्थिक स्वतंत्रता और संप्रभुता के लिए निर्णायक साबित होंगे।
आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब?
- अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए केवल बैंक या शेयर बाजार पर भरोसा पर्याप्त नहीं।
- सोने में निवेश अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा कदम बन गया है।
- सोना न केवल महंगाई से बचाव करता है, बल्कि वैश्विक संकट में भी स्थिर और भरोसेमंद संपत्ति साबित होता है।
दुनिया बदल रही है, और सोना इस बदलाव का केंद्र बन गया है। यह अब केवल गहनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशों और आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा और संप्रभुता का मजबूत आधार बनता जा रहा है।