भारत के झींगा, कालीन और स्वर्ण आभूषण क्षेत्र पर अमेरिकी शुल्क का सबसे ज्यादा असर : विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) भारत के झींगा मछली, कालीन, चिकित्सा उपकरण और स्वर्ण आभूषण जैसे निर्यात क्षेत्रों पर अमेरिका द्वारा बुधवार को घोषित 27 प्रतिशत शुल्क का असर देखने को मिलेगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और फार्मा जैसे निर्यात क्षेत्र अमेरिका में अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले थोड़ी बेहतर स्थिति रहेंगे।
दो अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक नई शुल्क नीति की घोषणा की।
घोषणा में सभी आयातित वस्तुओं पर एक सार्वभौमिक 10 प्रतिशत शुल्क शामिल है, जो पांच अप्रैल से प्रभावी होगा। वहीं नौ अप्रैल से 27 प्रतिशत का शुल्क लागू होगा। अमेरिका द्वारा घोषित उपायों से 60 से अधिक देश प्रभावित हो रहे हैं।
अमेरिका घरेलू झींगा मछली उद्योग का सबसे बड़ा बाजार है।
अधिक शुल्क के कारण अब झींगा मछली, अमेरिकी बाजार में काफी कम प्रतिस्पर्धी रह जाएगी।
अमेरिका ने पहले से ही भारतीय झींगा पर डंपिंग-रोधी और प्रतिपूरक शुल्क लगा रखा है।
भारत के कुल झींगा निर्यात में से 40 प्रतिशत अमेरिका को भेजा जाता है। अमेरिकी बाजार में घरेलू निर्यातकों के प्रमुख प्रतिस्पर्धी इक्वाडोर और इंडोनेशिया हैं।
वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान जमे हुए झींगा का निर्यात 7,16,004 टन था। पिछले वित्त वर्ष में अमेरिका ने 2,97,571 टन आयात किया, उसके बाद चीन (1,48,483 टन), यूरोपीय संघ (89,697 टन) और जापान (35,906 टन) का स्थान रहा।
मूल्य के संदर्भ में अमेरिका, भारतीय समुद्री खाद्य का प्रमुख आयातक बना रहा, जिसका आयात 2.55 अरब डॉलर का था। इस तरह अमेरिका के समुद्री खाद्य उत्पादों के आयात में भारत की हिस्सेदारी 34.53 प्रतिशत है।
जमी झींगा मछली, अमेरिका को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तु बनी रही, जिसकी हिस्सेदारी 91.90 प्रतिशत थी। अमेरिका को ब्लैक टाइगर झींगा का निर्यात मात्रा के लिहाज से 35.37 प्रतिशत और मूल्य के लिहाज से 32.35 प्रतिशत बढ़ा है।
इसी तरह, अमेरिका भारत से कालीन का सबसे बड़ा आयातक है। वित्त वर्ष 2023-24 में यह करीब दो अरब डॉलर था।
वित्त वर्ष 2023-2024 में, भारत ने वैश्विक स्तर पर 32.85 अरब डॉलर के रत्न और आभूषण निर्यात किए, जिसमें अमेरिका का हिस्सा 30.28 प्रतिशत (10 अरब डॉलर) था।
वर्ष 2024 में, भारत ने 11.88 अरब डॉलर के हीरे, सोने और चांदी का निर्यात किया। इसमें 13.32 प्रतिशत का शुल्क अंतर है।
देश तराशे और पॉलिश किए गए हीरे, जड़े हुए सोने के आभूषण, सादे सोने के आभूषण, प्रयोगशाला में तैयार किये गए हीरे और चांदी के आभूषणों सहित कई तरह के उत्पादों का निर्यात करता है।
कामा ज्वेलरी के प्रबंध निदेशक, कोलिन शाह ने कहा कि ‘‘यह भारत के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि अमेरिका ने जवाबी शुल्क की घोषणा की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘रत्न और आभूषण क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होगा क्योंकि केवल तराशे गये (यानी लूज) हीरे पर आयात शुल्क मौजूदा शून्य से 20 प्रतिशत और सोने के आभूषणों पर 5.5-7 प्रतिशत तक हो सकता है। अमेरिका भारत के सबसे बड़े आभूषण निर्यात बाजारों में से एक है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है।’’
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका को चिकित्सा उपकरण निर्यात पर 27 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने से इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
वित्त वर्ष 2023-24 में, भारत का अमेरिका को चिकित्सा उपकरण निर्यात 71 करोड़ 43.8 लाख डॉलर का था, जबकि अमेरिका से भारत में आयात काफी अधिक 1.52 अरब डॉलर का था।
सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत के लिए शुल्क में भारी वृद्धि के बावजूद, यह प्रथम दृष्टया परिधान क्षेत्र के लिए भारत के लिए लाभ का मामला प्रतीत होता है, क्योंकि भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों जैसे चीन, बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया और श्रीलंका पर अमेरिका द्वारा उच्च शुल्क लगाया गया है।
एईपीसी (परिधान निर्यात संवर्धन परिषद) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा, ‘‘हालांकि, मौजूदा ट्रंप शुल्क ब्राजील, तुर्की और इटली, जर्मनी और स्पेन जैसे अन्य परिधान निर्यातक यूरोपीय देशों को शुल्क-आधारित बढ़त प्रदान करता है। लेकिन, संपूर्ण मूल्य श्रृंखला की उपस्थिति के संदर्भ में भारतीय परिधान क्षेत्र की आंतरिक ताकत को देखते हुए, मेरा प्रारंभिक आकलन यह है कि यह अंततः भारत के पक्ष में काम करेगा और हमें इस अवसर को भुनाने के लिए खुद को तैयार करना चाहिए।’’
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा परिधान आयातक देश है, जो मुख्य रूप से एशिया से खरीद करता है।
एईपीसी ने कहा कि भारतीय परिधान निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग 35 प्रतिशत है। वर्ष 2024 में, अमेरिका को परिधान निर्यात वर्ष 2023 की तुलना में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.2 अरब डॉलर का हुआ था।
अमेरिका, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का सबसे बड़ा बाजार भी है। वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 30 अरब डॉलर के कुल निर्यात में अमेरिका का हिस्सा 33 प्रतिशत है।
अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, ब्रिटेन और इटली भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के लिए शीर्ष पांच निर्यात बाजार बनकर उभरे हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने फार्मास्युटिकल्स को जवाबी शुल्क से छूट दी है। इस क्षेत्र में देश का अमेरिका को निर्यात लगभग नौ अरब डॉलर का रहा।
खबरों के अनुसार, भारतीय कंपनियों की दवाओं ने वर्ष 2022 में अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को 219 अरब डॉलर की बचत और वर्ष 2013 से वर्ष 2022 के बीच कुल 1,300 अरब डॉलर की बचत प्रदान की, और भारतीय कंपनियों की जेनेरिक दवाओं से अगले पांच वर्षों में 1,300 अरब डॉलर की अतिरिक्त बचत होने की उम्मीद है।
फिलहाल अमेरिका में भारतीय दवाइयों पर कोई आयात शुल्क नहीं है। पिछले वित्त वर्ष के अप्रैल-जनवरी के दौरान निर्यात 7.84 प्रतिशत बढ़कर 24.3 अरब डॉलर हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 22.53 अरब डॉलर था। पूरे वित्त वर्ष 2023-24 में यह 27.84 अरब डॉलर था।
फार्मेक्सिल के चेयरमैन नमित जोशी ने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण निर्णय अमेरिकियों को आवश्यक और सस्ती दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करता है।’’