अमेरिकी जवाबी शुल्क भारत के कपड़ा उद्योग के लिए ‘अनुकूल स्थति’ : विशेषज्ञ

अमेरिकी जवाबी शुल्क भारत के कपड़ा उद्योग के लिए ‘अनुकूल स्थति’ : विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) अमेरिकी के जवाबी शुल्क ने भारत को कपड़ा निर्यात के मामले में ‘‘अनुकूल स्थिति’’ में ला दिया है, क्योंकि देश को चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे अन्य परिधान निर्यातक देशों की तुलना में सापेक्ष लागत का लाभ होगा।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना और विनिर्माण को बढ़ावा देना है। भारत द्वारा अमेरिकी वस्तुओं पर अधिक आयात शुल्क लगाये जाने की बात कहते हुए अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है।

रेमंड ग्रुप के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) अमित अग्रवाल ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘अमेरिका द्वारा घोषित जवाबी शुल्क स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि भारत चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे अन्य परिधान निर्यातक देशों की तुलना में अत्यधिक अनुकूल स्थिति में है। हमें पहले से ही अमेरिकी ग्राहकों से क्षमता उपलब्धता के बारे में पूछताछ मिलनी शुरू हो गई है।’’

इसी तरह की बात दोहराते हुए ईवाई इंडिया के भागीदार और खुदरा कर लीडर परेश पारेख ने कहा कि वर्तमान में भारतीय कपड़ा क्षेत्र की दृष्टि से ‘भारत लाभ’ की स्थिति में है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत कपड़ा निर्यात के लिए बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया, श्रीलंका, चीन, पाकिस्तान आदि देशों के साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दिलचस्प बात यह है कि भारतीय आयात के लिए लगभग 27 प्रतिशत शुल्क की तुलना में, इन देशों पर अमेरिका के शुल्क का अधिक असर पड़ा है: बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत, कंबोडिया पर 49 प्रतिशत, पाकिस्तान पर 29 प्रतिशत, चीन पर 54 प्रतिशत, श्रीलंका पर 44 प्रतिशत, आदि।’’

अमेरिका भारत से 36 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के वस्त्र आयात करता है।

पारेख ने कहा, ‘‘यह स्थिति भारतीय कपड़ा क्षेत्र के लिए अमेरिका में अपना बाजार हिस्सा हथियाने और बढ़ाने का अवसर प्रस्तुत करती है। हालांकि, इसमें एक जोखिम भी है - यदि उच्च कीमतों के कारण अमेरिका में खपत में मंदी आती है, तो समग्र अमेरिकी बाजार सिकुड़ सकता है।’’

हालांकि, अपोलो फैशन इंटरनेशनल जैसे कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप शुल्क एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी, खासकर कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यवसायों के लिए।

अपोलो फैशन इंटरनेशनल के अध्यक्ष शिराज असकरी ने कहा, ‘‘इससे अल्पावधि में मूल्य निर्धारण और मांग प्रभावित होगी, लेकिन उद्योग के मूल तत्व मजबूत बने हुए हैं। भारत ने एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, कुशल कार्यबल और गुणवत्ता निर्माण में क्षमता बढ़ाई है। ’’

अग्रवाल ने यह भी कहा कि अन्य प्रमुख बाजार शुल्क प्रभावित देशों से माल खरीदना जारी रख सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारत को उन बाजारों में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, असकरी ने इस बात पर भी सहमति जताई कि वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों की तुलना में भारत अधिक बेहतर स्थिति में है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब ध्यान, दक्षता में सुधार, अनुपालन को मजबूत करने और किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए बाजारों में विविधता लाने पर होना चाहिए। उद्योग ने पहले भी व्यवधानों को संभाला है, और यह एक और क्षण है जो स्मार्ट, निर्णायक कार्रवाई की मांग करता है।’’

डेलॉयट इंडिया के भागीदार और उपभोक्ता उद्योग के अगुवा, आनंद रामनाथन ने भी कहा कि चीन, वियतनाम और बांग्लादेश की तुलना में कम शुल्क अमेरिका को भारतीय कपड़ा निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करेंगे।’’

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