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राजा भैया को राज्यसभा भेजेगी सपा
लखनऊ।समाजवादी पार्टी में क्षत्रिय नेता की कमी को पूरा करने के लिए बाहुबलि विधायक रघुराज प्रताप सिंह उफर् राजा भैया को आगे बढ़ाने का फैसला लेते हुए उन्हें राज्य से राज्यसभा में भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अमर सिंह की जगह राजा भैया को सपा अपना नया क्षत्रिय चेहरा बनाएगी। राज्यसभा के लिए चार जुलाई को उचर प्रदेश में १० सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसी के तहत अमर के क्षत्रिय स्वाभिमान जागृत करने के अभियान में पलीता लगाने वाले रघुराज प्रताप सिंह उफर् राजा भैया को जुलाई में राज्यसभा भेजने की कोशिश शुरू हो गई हैं। राजा भैया को उम्मीदवार बनाकर मुलायम एक तीर से कई निशाने साध सकेंगे। अमर सिंह का जवाब देने के साथ ही पार्टी के लिए राज्यसभा में एक और सीट सुरक्षित करने की कामयाबी मिल सकेगी। गौरतलब है कि उप्र के दस राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल ४ जुलाई २०१० को समाप्त हो रहा है। इसमें भाजपा के एक, सपा के सात और बसपा के दो सदस्य हैं। विधानसभा की मौजूदा दलीय स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो बसपा के पास २२६ विधायक हैं। सपा के ८७, भाजपा के ४८, कांग्रेस के २०, रालोद के १०, राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी का एक और नौ निर्दलीय विधायक हैं। दो सीटें अभी खाली हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए ७३ विधायकों के मतों की जरूरत पड़ती है। इस लिहाज से देखें तो राज्यसभा में उार प्रदेश का आंकड़ा पूरी तरह उलट जाएगा। बसपा छह सांसद बनवाने में कामयाब हो सकती है जबकि कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल एक भी सांसद जितवाने की स्थिति में नहीं हैं। भाजपा के पास एक राज्यसभा सदस्य जितवाने के बाद ११ विधायक बचेंगे। सपा विधायकों की संख्या देखें तो स्पष्ट होता है कि दो राज्यसभा सदस्यों को अपने बूते जितवाने के बाद १३ विधायक अतिरिक्त बचेंगे। अगर सपा राजा भैया को तीसरे उम्मीदवार के रूप में भी खड़ा करती है तो वह अपने रिश्तों के रसूख पर कांग्रेस और भाजपा में न केवल अच्छी सेंध लगा सकते हैं बल्कि निर्दलीय विधायकों को अपनी ओर मोडऩे का करिश्ता दिखा सकते हैं। बसपा के सतीश मिश्र और अम्बेद राजन का कार्यकाल खत्म हो रहा है। पार्टी में इनकी अहमियत देखते हुए इनका दोबारा चुना जाना तय है। भाजपा के एक ही सांसद वरूण शौरी हैं। इनकी जगह पार्टी किसे भेजेगी यह अभी भविष्य के गर्भ में है। सपा की ओर से कमाल अख्तर, नंद किशोर यादव, जया बच्चन, भगवती सिंह, राम नारायण साहू, अमीर आलम खान और ब्रज भूषण तिवारी का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
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