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कार्डियोपल्मोनरी बाइपास के सहारे से बनाई सांस नली

नईदिल्ली। बिहार के पटना जिले में नीति कुमार (१८) सड़क हादसे में घायल हो गए। उनके सीने में सांस व भोजन नली के पास ७ सेंटीमीटर का छेद हो गया। इससे सांस व भोजन नली बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों आपस में मिल गई। ऐसी स्थिति में वे जिंदगी और मौत से लड़ रहे थे। एम्स के चार विभागों के डॉक्टरों ने साढ़े पांच घंटे सर्जरी कर उस छेद को ठीक किया और सांस की नली को दोबारा बनाया। खास बात यह है कि पहला बार र्कािडयोपल्मोनरी बाइपास का सहारा लेकर सांस की नली बनाई गई।
सर्जरी के दौरान मरीज की सांस नियंत्रित करने लिए हृदय की बाइपास सर्जरी में उपयोग होने वाली हार्ट लंग मशीन इस्तेमाल की गई। इस मशीन के जरिए डॉक्टरों ने नीति के पेâफड़े को पांच घंटे तक ाqस्थर रखा। नीति पटना जिले के फतुहां ाqस्थत जाफराबाद का रहने वाला है। पांच नवंबर को ट्रैक्टर से हुए हादसे में उसके सीने में गंभीर रूप से चोट लगी थी।
घटना के चार दिन बाद एंडोस्कोपी में पता चला कि भोजन व सांस नली पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं और बड़ा छिद्र होने से दोनों आपस में मिल गई हैं। इसके चलते सांस नली में लार जाने से उसका जीवन खतरे में पड़ गया है। वह १९ नवंबर को एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। उसी दिन सर्जरी विभाग के डॉ. अमित कुमार, डॉ. सुबोध कुमार, इएनटी सर्जरी विभाग के डॉ. एससी शर्मा, र्कािडयो सर्जरी व एनेस्थीशिया विभाग के डॉक्टरों ने सर्जरी की। ऑपरेशन र्कािडयो सर्जरी के ऑपरेशन थियेटर में किया गया। सबसे पहले र्कािडयोपल्मोनरी बाइपास किया गया। सर्जरी के दौरान लार सांस नली में जाने का खतरा था। इसलिए लार को बाहर निकालने के लिए एक पूâड नली बनाई गई और वंâधे के पास से बाहर निकाली गई। इसके बाद सांस व भोजन नली के बीच के हिस्से को जोड़ा गया। एम्स के निदेशक डॉ. एमसी मिश्र ने बताया कि सांस व भोजन नली से जुड़े मामले आते हैं। पर इस तरह का मामला पहले कभी नहीं देखा गया। अब वह ठीक है।

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