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अगले माह से महंगे हो सकते हैं होम ओर कार लोन

मुंबई (ईएमएस)। अपना मार्जिन बचाने के लिए बैंक मार्च या अधिक से अधिक अप्रैल से होम लोन और कार लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में बॉन्ड यील्ड्स में 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई है, जिससे बैंकों के लिए डिपॉजिट सर्टिफिकेट जारी करना महंगा हो गया है। यही नहीं, बाजार से उधार जुटाना महंगा हो जाने के कारण ऊंची रेटिंग वाली कंपनियां भी फंड जुटाने के लिए बैंकों के पास जा रही हैं, जिससे बैंकों के लिए रेट बढ़ाने की गुंजाइश बढ़ गई है।

एचडीएफसी बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट यानी एमसीएलआर में 10 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की थी। यह भी इस बात का संकेत है कि बैंक लेंडिंग रेट्स में बढ़ोतरी का रुझान है। एचडीएफसी बैंक से पहले ऐक्सिस, कोटक महिंद्रा, इंडसइंड और यस बैंक ने अपने एमसीएलआर रेट्स 5 से 10 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाए थे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकॉनामिक एडवाइजर सौम्यकांति घोष ने कहा, ‘इतने ऊंचे यील्ड्स ने सरकार की बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ा दी है और इससे बैंकों के एमसीएलआर रेट्स पर बढ़ोतरी का दबाव बनेगा।’
रेट हाइक के पहले संकेत तब मिलने शुरू हुए थे, जब बैंकों ने अपने बल्कि डिपॉजिट रेट्स में बढ़ोतरी शुरू की थी। एसबीआई ने इस दिशा में सबसे पहले कदम बढ़ाया था और दो महीनों में ही एक करोड़ रुपए से ज्यादा के एक साल के डिपॉजिट पर रेट 200 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.25 फीसदी कर दिया। आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि पांच जनवरी तक साल दर साल आधार पर बैंक लोन में 11.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। उसी अवधि में डिपॉजिट ग्रोथ रेट 4.5 फीसदी रही।

एचडीएफसी बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर परेश सुक्थंकर ने पिछले महीने संकेत दिया था कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा था खास तौर से लिक्विडिटी की स्थिति और इस तथ्य को देखते हुए कि सिस्टम लेवल पर भी पहली बार डिपॉजिट ग्रोथ के मुकाबले लोन ग्रोथ कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है, मुझे लगता है कि या तो दरों में कुछ ठहराव दिखेगा या अगर लिक्विडिटी की स्थिति ऐसी ही रही तो डिपॉजिट और लेंडिंग, दोनों की रेट्स में बढ़ोतरी का रुझान बन सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं लग रहा है कि बैंकों के बेस रेट और एमसीएलआर को मिलाने का आरबीआई का ताजा कदम उचित समय पर उठाया गया है, क्योंकि करीब चार वर्षों के नरमी के चक्र के बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जमीन बन रही है। खासतौर से यह देखते हुए कि मार्केट लीडर एसबीआई ने अपना एमसीएलआर नहीं बढ़ाया था और उसने पिछले महीने अपनाबेस रेट 30 बेसिस प्वाइंट्स घटा दिया था। हालांकि किसी भी दूसरे बैंक ने यह राह नहीं पकड़ी थी।

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