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आई लव यू और चुम्बन करना सेक्स के लिए सहमति?

नई दिल्ली (ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए व्यवस्था दी है कि आई लव यू कहना और किसी के साथ किस (चूमना) और बाद में यह कहना कि वह सेक्स के लिए सहमति नहीं थी, यह ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में कथित दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी पीपली लाइव के सह-निर्देशक महमूद फारूकी को बरी कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय को उचित मानते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एसए बावडे और एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा दो परिचितों में शारीरिक संबंध के दौरान कई बार ना का मतलब भी हां होता है। यदि असहमति हो तो, स्पष्ट और जोरदार तरीके से होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने पूछा कि महिला आरोपी के घर जाती थी। साथ में ड्रिंक लेती थी। इस पर महिला के वकील ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी सेक्स के लिए सहमति थी। जज साहब ने पुनः पूछा कि उसने कैसे बताया कि उसकी सहमति नहीं थी। इस पर महिला के वकील ने कहा की महिला ने कई बार मना किया था। जज साहब ने पुनः पूछा कि अभियोजन में सिद्ध हुआ है कि उसने आरोपी को कई बार आई लव यू कहा और उनके बीच किस चुम्मन करने के भी संबंध थे। इस पर महिला के वकील ने कहा कि यह होना यौन संबंधों के लिए सहमति नहीं माना जाना चाहिए। सेक्स के लिए स्पष्ट सहमति जरूरी है।इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा की चुंबन और आई लव यू तथा कई बार आरोपी के घर जाना इसे एक तरह से सेक्स के लिए सहमति मानने जैसा है।यह कहते हुए उन्होंने हाईकोर्ट के निर्णय को यथावत रखा।

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