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दुनिया के लिए सिर दर्द बनेंगे ट्रंप के पांच फैसले

अगर येरुशलम को इजरायल की राजधानी मान लिया तो फसाद तय

वाशिंगटन (ईएमएस)। डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका की सत्ता में आए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ, लेकिन उनके एक के बाद एक फैसले पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। खबर है कि ट्रंप बुधवार को येरूशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में स्वीकार कर लेंगे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप अपने भाषण में येरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता दे सकते हैं। इस खबर के आते ही एक बार फिर खाड़ी देशों में तनाव का माहौल बन गया है। सऊदी अरब के सुल्तान सलमान, फलस्तीनी नेता महमूद अब्बास, जॉर्डन के सुल्तान अब्दुल्ला और मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुलफतह अल सिसी ने आशंका जताई है कि ऐसा होने पर हालात बिगड़ सकते हैं।

गौरतलब है कि येरूशलम, इजरायल और फलस्तीनियों के बीच विवाद का सबसे गंभीर मुद्दा है। अगर अमेरिका येरूशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में स्वीकार करता है तो वह इजरायल के जन्म के बाद यानी 1948 के बाद ऐसा करने वाला पहला देश होगा। इसके अलावा ट्रंप के पांच फैसले और ऐसे हैं, जिसके भविष्य में वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। साल के मध्य में ट्रंप पर्यावरण संतुलन के लिए किए गए पेरिस समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा कर चुके हैं। पेरिस समझौता वैश्विक स्तर पर पहला व्यापक जलवायु परिवर्तन समझौता है। 2015 में दुनियाभर के नेताओं के बीच यह सहमति बनी थी कि वैश्विक औसत तापमान को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे लाया जाए।

ऐसा करने के लिए दुनियाभर के देशों ने कार्बन उत्सर्जन में कमी का वादा किया था। अमेरिका की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सितंबर 2016 में इस पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिका कार्बन के सबसे बड़े उत्सर्जक देशों में से एक है और उसके हटने से हो सकता है कि अन्य देश भी ऐसा ही रुख अपनाएं। ऐसा होने पर पर्यावरण को संतुलित रखने के अभियान पर व्यापक असर पड़ सकता है। ट्रंप का एक और विवादित फैसला छह मुस्लिम देशों चाड, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सीरिया और यमन के लोगों को अमेरिका आने पर प्रतिबंध लगाना रहा। इसी साल जनवरी में सत्ता में आने के बाद उन्होंने यात्रा प्रतिबंध संबंधी फैसला लिया था।

हालांकि इस फैसले का न सिर्फ उनके देश में विरोध हुआ, बल्कि पूरी दुनिया में भी इसकी आलोचना हुई। अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप के फैसले पर रजामंदी देते हुए इसे पूरी तरह लागू करने का निर्देश दे दिया है। इससे दुनिया में अमेरिका की छवि खराब हुई है। इसके अलावा उन्होंने उत्तर कोरिया और वेनेजुएला के कुछ सरकारी अधिकारियों के अमेरिका आने पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिससे इन देशों के अमेरिका से रिश्ते खराब हुए हैं।

 

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