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जनाब आने वाले समय में लड़की की जगह रोबोट से डेट करेंगे लोग

लंदन (ईएमएस)। रोमांटिक पार्टनर के न होने पर पश्चिमी देशों में रोबोट के साथ सेक्स कॉमन होता जा रहा है। यहां तक कि वास्तविक जिंदगी के साथी से भी ऊपर अब सेक्स रोबोट को तरजीह दी जा है। हालांकि हालिया शोध कहता है कि कुछ वक्त बाद ऐसा भी हो सकता है कि ज्यादातर लोग ‘डिजिसेक्सुअल’ इंसानों में तब्दील हो जाएं, जिनकी शारीरिक और भावनात्मक जरूरतें वर्चुअल यानी आभासी दुनिया से ही पूरी हो जाएं,कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ मेनिटोबा ने यह शोध किया, जो जर्नल ऑफ सेक्सुअल एंड रिलेशनशिप थैरेपी में छपी है। शोधकर्ता नील कैकऑर्थर कहते हैं कि अब यह कहा जा सकता है कि हम वर्चुअल सेक्स की दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं। जैसे-जैसे तकनीक और समृद्ध होती जाएगी, हममें से बहुत से लोगों को अहसास होगा कि हम डिजिसेक्सुअल हैं।

डिजिसेक्सुअल यानी वे लोग जो तकनीक के जरिए सेक्स को प्राथमिकता देते हैं। शोध बताता है कि चूंकि लोग सेक्स रोबोट को अपनी जरूरतों और पसंद के अनुसार कस्टमाइज करवाते हैं तो वे इसके साथ ज्यादा सहज महसूस करते हैं और कई बार इसके साथ ऐसे प्रयोग भी कर सकते हैं जो किसी जीते-जागते इंसान के साथ करना मुश्किल हो सकता है। मसलन ये रोबोट इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि ये इंसानों की सेक्सुअल जरूरतों की पूर्ति कर सकें। पसंद के अनुसार कस्टमर इन सेक्स रोबोट को ऑर्डर भी कर सकते हैं। कई कस्टमर रंग,आंखों के रंग, वजन, बाल जैसी चीजों में भी अपनी पसंद से बदलाव करवाते हैं। इन हाईटेक सेक्स डॉल्स की त्वचा सिलिकॉन की बनी होती है जो छूने पर इंसानों की तरह ही गर्म महसूस होती है और ये प्रतिक्रिया भी करती हैं।

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