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सेलफोन के कारण हो रही ब्रेंन कैंसर, ब्रेंन स्टर्क, और नंपुसकता

सभी के लिए घातक हैं जेब में मोबाइल को रखना

भोपाल (ईएमएस)। आजकल दुनिया में कुछ हो ना हो, लेकिन यदि स्मार्टफोन आपके पास हैं तो सबकुछ है। आजकल हमारी सुबह ,दोपहर शाम और देर रात तक का समय सेलफोन की संगत में बीतता है,लेकिन शायद ही आज लोगों को इस बात की जानकारी हैं कि नहीं कि वहां अपने साथ मौत का सामना लेकर चल रहा है। आप सोच रहे होंगे की हम किसी चीज को मौत का सामना कहर रहे है। यह मौत का सामना और कुछ नहीं आपका प्यार स्मार्टफोन है।जिस स्मार्टफोन को अब जेब में रखकर घूम रहे हो। यह बात हम नहीं आईआईटी मुंबई के वैज्ञानिक ने कहा हैं कि रोजाना 30 मिनट से ज्यादा सेलफोन का उपयोग करके से ब्रेन कैंसर का खतरा 400 गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही ब्रेन स्टर्क, और नपुंकसता का भी कारण बन रहा है।

यानी आज मोबाइल को ऊपर के पैकेट में रखा तो दिल में परेशानी और नीचे की जेब में रखा तो नपुंकसता की वजह बन सकता है। यह परेशानी सिर्फ लड़कों नहीं बल्कि लड़कियों में भी इस बात की समस्या हो सकती है। दरअसल आईआईटी मुंबई के वैज्ञानिक गिरीश कुमार का कहना है कि युवाओं में स्मार्टफोन के अति उपयोग के कारण ब्रेन कैंसर का खतरे के साथ कई दूसरी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। वे युवा जो कि 30 मिनट से ज्यादा अपने फोन का इस्तेमाल लगातार करते हैं उनके लिए तो यह मानों मौत की तैयारी के सामना हो सकता है। उन्होंने एक रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंपी हैं जिसमें बताया गया है सेलफोन की जरुरत से ज्यादा उपयोग करने से शरीर में फ्री रेडिकल्स रिलीज होते हैं जो कि पुरुषों में नंपुसकता का बहुत बड़ा कारण है।

मोबाइल का खामियाजा बच्चों और युवाओं को इसलिए ज्यादा नुकसान हो सकता हैं क्योंकि उनके दिमाग का बाहरी आवरण अपेक्षाकृत पतला होता हैं इसकारण रेडिएशन आसानी से घुसपैठ करता है। मोबाइल रेडिएशन से मानव शरीर में डीएनए को क्षति हो रही है। इंटरनेशनल एजेंसी फोर रिसर्च ऑन कैंसर ने रेडियों फ्रिक्वेंसी को मनुष्य में कैंसर की वजह माना है। हाल ही में स्वीडिश रिसर्च ने मोबाइल फोन के कारण दिमाग में टयूमर की बात पाई हैं हालांकि उसमें 20 साल का समय लगता है। सेलफोन का क्रेज इतना अधिक बढ़ चुका हैं कि लोगों इस फोन के कारण अपनी नींद का बलिदान देने के लिए तैयार हो रहे है। कई सारे अध्यन में खुलासा हो रहा हैं कि सोने के एक घंटा पहले सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से खुद को दूर कर लेना चाहिए। क्योंकि मोबाइल फोन की नीली रोशनी नींद को चुरा रही है।

मोबाइल रेडिएशन केवल कैंसर से नहीं जुड़ा हैं बल्कि दिल के लिए भी गंभीर खतरा है। इन विकिरणों के प्रभाव से लाल रक्त कणिकाएं हीमोग्लोबिन चूसने लगती है। और हदय की गतिविधि बुरी तरह प्रभावित होती है। मोबाइल फोन के रेडिएशन से पुरुषों के स्पर्म की संख्या कम हो रही है।मोबाइल रेडिएशन का ही दुष्प्रभाव है कि लोगों की सुनने की क्षमता कम हो रही है। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक सेलफोन के इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फील्डस से रहने से सुनने की क्षमता कम होती है। जो लोग हर दिन 2 घंटे से ज्यादा समय तक मोबाइल फोन पर बात करते हैं उनकी सुनने की क्षमता ज्यादा कम हो जाने का खतरा रहता है।

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