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दिवालिया बैंकों को बचाने के लिए सरकार ला रही है नया बिल

बैंकों में जमा धनराशि को मनमर्जी से नहीं निकाल सकेंगे खाताधारक

स्थाई नोटबंदी का प्रारूप होगा सरकार का फाइनेंसियल रेजोल्यूशन एंड डिपाजिट इंश्योरेंस बिल

बैंकों के बचत खाते और डिपाजिट आएंगे सरकारी कानून के दायरे में

सरकार तय करेगी बैंकों में जमा कितना धन निकाल सकते हैं खाताधारक

नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में फाइनेंसियल रेग्युलेशन एंड डिपाजिट इन्श्योरेंस बिल 2017 लेकर आ रही है। इस ‎बिल के पास हो जाने के बाद बैंकों से अपनी जमा राशि निकाल पाना खाताधारकों के लिए संभव नहीं रह जाएगा। सरकार बैंकों की खस्ता हालत और दिवालिया होने से बचाने के लिए यह ‎बिल लेकर आ रही है। इस ‎बिल के पास हो जाने से सरकार को अधिकार मिल जाएगा। उपभोक्ता बैंकों में जमा पूंजी कब और किस तरह निकाल सकते हैं। यह ‎निर्देश सरकार की ओर से जारी होगा। यह कानून ही पास हो जाता है तो स्थाई रूप से नोटबंदी का नया ‎सिस्टम देश में खड़ा हो जाएगा।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में एफआईडीआई बिल 2017 संसद में पेश करने जा रही है।

संसद के दोनों सदनों में सरकार को स्पष्ट बहुमत होने के कारण यह बिल आसानी से पास भी हो जाएगा। केंद्र सरकार ने मानसून सत्र में संसद में पेश किया था। तब इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास सुझाव के लिए भेजा गया था। केंद्र सरकार ने ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सुझाव के बाद इस बिल को संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है।इस नए कानून में सरकारी बैंक प्राइवेट बैंक बीमा कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थाओं को दिवालियापन से बचाने के लिए सरकार यह बिल कानून के ‎लिए संसद में लेकर आ रही है। इस ‎बिल के पास हो जाने के बाद वित्तीय संस्थानों पर सीधा नियंत्रण सरकार का हो जाएगा। सरकार इस मामले में नियम बनाने और जमा धन किस तरह निकाला जाए, इसके लिए अधिकार प्राप्त कर लेगी।

इस ‎बिल के पास हो जाने के बाद वित्त मंत्रालय के अधीन एक नए रेगुलेशन कारपोरेशन की स्थापना का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा। अभी तक रिजर्व बैंक वित्तीय संस्थानों पर नियंत्रण करता था, किंतु नया कानून पास हो जाने के बाद अब यह काम कारपोरेशन करेगा। बैंकों के पंजीकरण योजना तथा इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की मंजूरी इत्यादि का काम भी यही कारपोरेशन करेगा।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों में जमा धन पर नियंत्रण का अ‎धिकार कारपोरेशनका हो जाएगा। यदि किसी संस्थान और बैंक की आर्थिक स्थिति खराब है, तो यह कारपोरेशन तय करेगा की जमा धारक कब और कितना पैसा निकाल सकता है।

 

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