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सत्तर फीसदी भारतीयों में विटामिन डी की कमी

नई दिल्ली (ईएमएस)। अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि विटामिन डी से हृदय रोग, स्कलेरोसिस और यहां तक कि गठिया जैसे रोगों के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही एक अध्ययन में यह भी सामने आया है कि विटामिन डी की कमी से डिमेंशिया का जोखिम भी बढ़ सकता है। रिसर्च के अनुसार, भारत में धूप की कोई कमी नहीं है, फिर भी लगभग 65 से 70 फीसदी भारतीय लोगों में इस सबसे जरूरी विटामिन की कमी है। विटामिन डी शरीर की लगभग हर कोशिका को प्रभावित करता है। यह धूप में रहने पर त्वचा में उत्पन्न होता है। यह कैल्शियम को अवशोषित करता है। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। विटामिन डी का स्तर कम होने पर हड्डियों को नुकसान पहुंचता है। हालांकि, ये विटामिन हार्ट, ब्रेन और इम्यून सिस्टम के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि विटामिन डी की कमी मैटाबोलिक सिंड्रोम, हार्ट डिजीज़ और फर्टिलिटी कपैसिटी से जुड़ी हुई है। शोध से पता चला है कि इसकी कमी से डिमेंशिया भी हो सकता है। डॉ. अग्रवाल का कहना हैं कि साल में कम से कम 40 दिन 40 मिनट रोजाना सूर्य की रोशनी में रहना चाहिए। इसका सही लाभ तब मिलता है जब शरीर का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा सूर्य की रोशनी के संपर्क में आए। विटामिन डी-2 एर्गोकैल्सीफेरॉल हमें फूड्स से मिलता है, जबकि विटामिन डी 3 कोलेकैल्सीफेरॉल धूप से। दोनों विटामिन हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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