नई दिल्ली । देश के शहरों में एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक एक करोड़ ७८ लाख मकानों की कमी है जबकि एक करोड़ से ज्यादा मकान खाली पड़े हैं। शहरों में रहने वाले कुल ८.११ करोड़ परिवारों में से १.८७ करोड़ परिवारों के पास रहने की उचित जगह नहीं है।
शहरों में आवास की कमी पर आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय की ओर से गठित तकनीकी समूह की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट को आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री कुमारी सैलजा ने जारी किया। सैलजा ने बताया कि केंद्र आवासीय योजनाओं के लिए राज्यों को मदद दे रही है। इसी का नतीजा है कि २००७ में शहरी भारत में २.४७ करोड़ मकानों की कमी थी जो अब घटकर १.८७ करोड़ रह गई है। तकनीकी समूह के अध्यक्ष प्रो. अमिताभ कुंडू का कहना है कि यह विडंबना है कि जिस देश में करोड़ों लोगों के पास रहने लायक जगह भी नहीं हैं वहां एक करोड़ दस लाख मकानों में कोई रहने वाला नहीं है। मतलब साफ है कि उच्च वर्ग के लोग जरूरत के बगैर मकान खरीद रहे हैं जिससे बनावटी मांग पैदा होती है और आम आदमी के लिए घर खरीदना महंगा होता जा रहा है। कुंडू ने सरकार को सस्ते और छोटे मकानों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक मकानों की सबसे ज्यादा कमी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों में है। सैलजा का कहना है कि सरकार लोगों को किराए पर भी घर मुहैया कराना चाहती है। मौजूदा आवास योजनाओं में किराए के घर को शामिल करने की तैयारी चल रही है। किराए के घर की योजना के लिए केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक सहायता देने को तैयार है।