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गुजरात-महाराष्ट्र में घटा पैट्रोल-डीजल पर वैट

गुजरात में पेट्रोल 2.93 और डीजल 2.72 रु. तक नीचे

महाराष्ट्र में पेट्रोल 2 रुपये, डीजल 1 रुपये सस्ता

नई दिल्ली (ईएमएस)। केन्द्र सरकार की सलाह पर भाजपा शासित राज्यों ने पेट्रोल-डीजल से वैट घटाने का काम शुरू कर दिया है। गुजरात पहला राज्य बन गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने बीते बुधवार को ही कहा था कि सरकार पेट्रोल और डीजल पर वैट की दर घटाएगी। आज मंगलवार को उन्होंने वैट कटौती का ऐलान कर दिया। इस मौके पर सीएम रुपाणी ने कहा कि वह फ्यूल पर लगनेवाले वैट में 4 पर्सेंट की कमी कर रहे हैं। नए वैट दर से गुजरात में पेट्रोल 2.93 रुपये जबकि डीजल 2.72 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो जाएगा।

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने 3 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी अब राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाना शुरू किया है। जिसके बाद लोगों को और राहत मिलने की उम्मीद है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी एक्साइज ड्यूटी में कटौती के एलान के समय कहा था कि अब राज्यों के ऊपर है, कि वो कितना वैट कम करके अपने नागरिकों को राहत देते हैं। पेट्रोल-डीजल फिलहाल जीएसटी के दायरे में नहीं है जिसकी वजह से हर राज्य में इन पर टैक्स, वैट की दरें अलग-अलग हैं।

गुजरात सरकार के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी पेट्रोल पर 2 रुपये और डीजल पर 1 रुपये वैट घटा दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) घटा दिया है जिसके बाद ईंधन कीमतों में कटौती हुई है। राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दाम 79.58 रुपये से घटकर 77.58 रुपये हो गए हैं। वहीं मुंबई में डीजल के दाम 60.55 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। ये घटे हुए दाम आज सुबह 6 बजे से लागू हो चुके हैं। वहीं सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और मप्र की शिवराज सरकार भी टैक्स घटाने पर विचार शुरू कर दिया है। भी पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने पर विचार कर रही है, लिहाजा यहां की जनता को भी शायद सस्ते पेट्रोल-डीजल का तोहफा मिल सकता है।

गौरतलब है कि 6 अक्टूबर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के दौरान भी धर्मेंद्र प्रधान ने उनसे राज्य में वैट दरें 5 फीसदी घटाने की अपील की थी. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने तो उलटा केंद्र सरकार को ही सलाह दे दी। सोमवार को इस मुद्दे पर गेंद केंद्र सरकार के पाले में डालते हुए नीतीश ने केंद्र से पेट्रोलियम पदार्थो पर बेस प्राइस कम करने को कहा। नीतीश ने कहा, ‘बिहार में पेट्रोलियम प्रॉडक्ट पर बेस प्राइस पड़ोसी राज्यों के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। यदि बेस प्राइस का दोबारा आकलन कर इसे कम किया जाए तो वैट अपने आप घट जाएगा और लोगों को इसका फायदा भी मिलेगा।’

दूसरी ओर केरल और ओडिशा जैसे गैर-बीजेपी शासित राज्यों ने वैट कम करने से इनकार करते हुए पेट्रोल-डीजल के बढ़े रेट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। खास बात यह है कि भाजपा शासित छत्तीसगढ़ ने भी पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने से साफ इनकार कर दिया। छत्तीसगढ़ के कॉमर्स मिनिस्टर अमर अग्रवाल ने भी राज्य में पहले से ही कम वैट का हवाला देते हुए कहा कि उनके लिए वैट कम करने का फैसला लेना कठिन है।

लंबे समय से ये कहा जा रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वसूले जाने वाले टैक्स को बढ़ाने से ही देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बेहद ऊंचे हैं। गौरतलब है कि राज्यों में लगने वाले विभिन्न टैक्स के कारण ही 27 रुपये प्रति लीटर (लगभग) के पेट्रोल पर लोगों को करीब 37 रुपये तक टैक्स चुकाना पड़ता है. जैसे राजधानी दिल्ली में अभी पेट्रोल-डीजल पर वैट 27 फीसदी है और अगर यहां की सरकार इनपर करीब 5 फीसदी वैट घटा दे तो कम से कम यहां दाम 2.70 रुपये तक पेट्रोल के दाम सस्ते हो सकते हैं।

बहरहाल, पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें कम करने का दबाव केंद्र एवं राज्य सरकारों पर बढ़ गया है। टैक्स कम होने से राज्यों की आर्थिक स्थिति तेजी से खराब होगी। जिसका दबाव केंद्र सरकार को भी झेलना पड़ेगा। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकारों के राजस्व में कमी आने पर भरपाई केंद्र को करना होगी।

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