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 नई पीढ़ी को नौ से पांच के मुकाबले लचीलेपन वाली नौकरी ज्यादा पसंद

नई दिल्ली (ईएमएस)। समय के साथ सबकुछ बदलता है इसी बदलाव में अब नौकरी करने का समय पर तरीका बदल गया है। एक समय था जब लोगों का सपना नौ से पांच की बढ़िया नौकरी हो तो जिंदगी की गुजर-बसर आराम से हो जाता था लोग इस नौकरी को सबसे बेहतर मानकर चलाते थे लेकिन समय बदला, नौकरी की इच्छा करने वालों का रुझान बदला और बाजार बदला जिसके चलते नौ से पांच की यह नौकरी करने का अंदाज भी बदल गया। अब लोग और कंपनियों दोनों ने ही काम करने-करवाने के नए तरीके इजाद कर लिये हैं। इनमें पार्ट-टाइम, फ्रीलांस, कॉन्ट्रैक्ट पर, अस्थायी तौर पर और स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने की ओर रुझान बढ़ रहा है।

शोध संस्थान मैनपावर ग्रुप की एक रिसर्च ‘नेक्स्ट जेन वर्क’ में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और मैक्सिको जैसे उभरते बाजारों में फ्रीलांस, कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी कर्मचारी के तौर पर काम करने को लेकर स्वीकार्यता बढ़ी है और करीब 97 फीसदी लोग इसी प्रकार के काम करते हैं, यह अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों की तुलना में कहीं अधिक है। हालांकि रिपोर्ट में जर्मनी, नीदरलैंड और जापान को नई पीढ़ी के कामकाजी तरीकों (नेक्सट जेन वर्क) का सबसे प्रतिरोधी देश बताया गया है। इस रिसर्च में 12 देशों के 9,500 लोग शामिल हुए, इनके अनुसार नई पीढ़ी नौ से पांच की नौकरी के मुकाबले बैलेंस्ड और लचीलेपन वाली नौकरी को ज्यादा पसंद करती है।

भारत में इस सर्वे के लिए 785 लोगों के नमूने का उपयोग किया गया, इसमें 85फीसदी से ज्यादा लोगों ने नई पीढ़ी के कामकाजी तरीकों को अपनी पसंद बताया। मैनपावर ग्रुप के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोनास प्राइसिंग ने कहा कि पिछले 10 से 15 सालों में नौकरी के अवसरों में वृद्धि भी गैर-पारंपरिक तरीके के रोजगारों में हुई है।

 

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