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राष्ट्रव्यापी प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान का शुभारंभ

समस्याओं के निवारण का संशोधन करने और समाज के प्रति संवेदना के लिए संकल्पबद्ध हों युवाः प्रधानमंत्री

 बिचौलियों को दूर करके सरकार ने तीन वर्ष में देश के 58 हजार करोड़ बचाएः रविशंकर प्रसाद

गांधीनगर (ईएमएस)| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गांधीनगर के नजदीक पालज गांव के पास साबरमती तट पर 897 एकड़ जमीन में निर्मित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आईआईटी का वर्ल्ड क्लास संकुल राष्ट्र को अर्पित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के उज्जवल भविष्य के लिए देश के सामान्य नागरिक की समस्या को हमेशा स्मरण रखकर उसका निवारण हो, ऐसे संशोधन करने और समाज के प्रति संवेदना के लिए युवाओं को संकल्पबद्ध होना होगा। आईआईटी के छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अभ्यास में संशोधन को विशेष महत्वपूर्ण बतलाया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के संशोधन कार्य मात्र परीक्षालक्ष्यी नहीं बल्कि समाज की समस्याओं के निवारणलक्ष्यी होने चाहिए। अटल इनोवेशन मिशन के माध्यम से देश के युवाओं को संशोधन क्षेत्र में प्रेरित करते हुए उन्होंने युवाओं का देश और दुनिया के विकास के लिए योगदान करने का आह्वान किया। साथ ही समस्याओं के समाधान के लिए संशोधन कार्यों पर बल देते हुए उन्होंने आईआईटी गांधीनगर में संशोधनात्मक संस्कृति का निर्माण करने का भी अनुरोध किया।

प्रधानमंत्री ने भारत की 20 यूनिवर्सिटियों को विश्व की टॉप 500 यूनिवर्सिटियों में उच्चतम स्थान दिलवाने के लिए यथासंभव प्रयत्न और कठोर परिश्रम करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा का स्थान और महत्व विश्व में उच्चतम रहे, ऐसी उनकी अपेक्षा है। आजादी के 70 वर्ष में भी भारत की एक भी यूनिवर्सिटी ने विश्व की टॉप 500 यूनिवर्सिटियों में स्थान प्राप्त नहीं किया है। उन्होंने भारत की 10 निजी यूनिवर्सिटियों और 10 सरकारी यूनिवर्सिटियों को यथासंभव तैयार करवाकर विश्व की उच्च यूनिवर्सिटियों में स्थान दिलवाने का आह्वान किया। भारत सरकार इसके लिए 100 करोड़ की आर्थिक सहायता भी देगी। इतना ही नहीं, ऐसी संस्थाओं को आवश्यकता पड़ने पर भारत सरकार या राज्य सरकार के नियमों में से भी मुक्ति दी जाएगी। यूनिवर्सिटियों को उनकी शक्ति की अभिव्यक्ति के लिए आवश्यक तमाम प्रकार की स्वतंत्रता देने का आश्वासन देते हुए उन्होंने आईआईटी-गांधीनगर को यह चुनौती स्वीकार करने का अनुरोध किया।

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने गांधीनगर के नजदीक आईआईटी के लिए इतनी महंगी और मौके की जमीन आवंटित की थी, तब गांधीनगर कैम्पस तमाम आईआईटीज में सिरमौर बने, ऐसी उम्मीद जताई थी। यह स्वप्न आज साकार हुआ है इसका प्रधानमंत्री ने आनंद व्यक्त किया। गांधीनगर में आईआईटी के नवनिर्मित संकुल के लोकार्पण समारोह के साथ ही प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्रव्यापी प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान का शुभारंभ भी करवाया। गुजरात के साथ ही राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से पधारे कॉमन सर्विस सेन्टर के हजारों कार्यकर्ता और युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वराज्य की स्थापना के लिए पूज्य महात्मा गांधी जी ने साक्षरता अभियान को प्राथमिकता दी थी। लेकिन आज सुराज्य की स्थापना के लिए डिजिटल साक्षरता अनिवार्य है। ग्रामीण भारत में बसे 6 करोड़ परिवारों को डिजिटली साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए भारत सरकार ने योजनाबद्ध रूप से काम शुरू किया है।

शासन व्यवस्था में अब तक कार्ल मार्क्स की ‘हैव एंड हैव नॉट्स’ की थ्योरी का महत्व था और इस थ्योरी को केन्द्र में रखकर ही आयोजन हुआ करते थे। लेकिन अब राजनीति में भारत के उज्जवल भविष्य के लिए डिजिटल ज्ञान को विशेष प्राथमिकता देनी पड़ेगी। इसका उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि समाज में डिजिटली साक्षर और डिजिटली निरक्षर जैसा भेद पैदा न हो, यह सामाजिक समरसता के लिए आवश्यक है। सामाजिक समरसता बरकरार रखने के लिए भी टेक्नोलॉजी का ज्ञान समाज के प्रत्येक नागरिक में प्रसारित हो, यह आवश्यक है। गुड गवर्नेंस और पारदर्शिता के लिए भी डिजिटल साक्षरता को उन्होंने आवश्यक बतलाया। भारत सरकार अब प्रत्येक व्यक्ति के मोबाइल पर मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत के सर्वांगीण विकास के लिए जाम- जे- जनधन खाता, ए- आधार कार्ड और एम- मोबाइल फोन को आपस में जोड़ा गया है। इन तीनों को जोड़कर विकास यात्रा के कदम उठाए जा रहे हैं।

समग्र भारत में ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाने के सरकार के संकल्प की अभिव्यक्ति के साथ उन्होंने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जन सुविधाओं में आमूलचूल परिवर्तन लाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के उपयोग से ही क्रांति आएगी और टेक्नोलॉजी ही समाज का चालक बल बनेगा। किसी भी देश को प्रगति करनी हो तो उसे टेक्नोलॉजी के साथ जुड़ना ही पड़ेगा और उज्जवल भविष्य के निर्माण के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग जरूरी भी है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि डिजिटल इंडिया और डिजिटल साक्षरता अभियान को सफल बनाने में गुजरात सक्रिय सहयोग प्रदान कर देश को नई राह दिखलाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य के विद्यार्थियों को घर बैठे ही वैश्विक स्तर की शिक्षा प्राप्त हो, इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने ऐसे आयाम शुरू किए थे। आज यह आयाम साकार हो रहे हैं। राज्य में अहमदाबाद में बिजनेस क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करने के लिए जिस प्रकार आईआईएम इंस्टीट्यूट है उसी प्रकार टेक्नोलॉजी क्षेत्र में विश्वस्तरीय टेक्नोक्रेट बनाने के लिए आईआईटी-गांधीनगर भी देश के सर्वांगीण विकास में अपना सक्रिय योगदान प्रदान करेगी। टेक्नोलॉजी के माध्यम द्वारा देश के विकास के लिए प्रधानमंत्री द्वारा जो नये अभिगम शुरू किए गए हैं उनमें डिजिटल इंडिया के निर्माण के लिए बालक से लेकर वृद्ध भी डिजिटलाइजेशन के साथ शामिल होकर सामूहिक प्रयास करेंगे तो निश्चित रूप से बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।

प्रधानमंत्री द्वारा मेक इन इंडिया के निर्माण के लिए भी जो प्रयास शुरू किए गए हैं उसके लिए राज्य सरकार ने सकारात्मक अभिगम अपनाते हुए प्रत्येक तरह की सुविधाएं राज्य के युवाओं को उपलब्ध करवाई हैं और इस क्षेत्र में भी गुजरात देश भर में अग्रिम रहेगा। रूपाणी ने कहा कि राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों को टेक्नोलॉजी की शिक्षा स्थानीय स्तर पर प्राप्त हो सके, यह स्वप्न प्रधानमंत्री ने आईआईटी-गांधीनगर के रूप में देखा था, जो आज साकार हो गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने रिवरफ्रंट के विकास की परिकल्पना की थी और यह भी साकार हुई है। ऐसे अनेक नये-नये आयाम श्री मोदी ने उनके गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए सोचे थे जो आज साकार हुए हैं और उनके रास्ते पर चलते हुए ही गुजरात देश का ग्रोथ इंजन साबित हो रहा है।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गांधीनगर आईआईटी को यंग एवं श्रेष्ठ करार देते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया के स्वप्न को साकार करने के लिए भारत भर के 4.5 लाख विद्यार्थियों ने गांव-गांव जाकर नागरिकों को डिजिटल शिक्षा प्रदान की है जो देश के लिए गौरव की बात है। इस संस्था में विदेशी फैकल्टियां भी अपना श्रेष्ठ योगदान दे रही है और विद्यार्थियों के साथ ही फैकल्टी भी यंग है जो इस संस्था की विशेषता है। आगामी समय में 10 से 15 हजार कॉलेज-संस्थाओं के 15 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों द्वारा ३ करोड़ जितने परिवारों को डिजिटल शिक्षा प्रदान कर देश को डिजिटल साक्षर बनाने का संकल्प किया गया है। आईआईटी-गांधीनगर सही अर्थों में वाइब्रेंट है और स्मार्ट भी है। गांधीनगर आईआईटी के लिए 517 करोड़ रुपयों की मंजूरी दी गई थी पर उसमें से 500 करोड़ के खर्च से यह ग्रीन और स्मार्ट कैम्पस साबरमती नदी के तट पर निर्मित किया गया है।

प्रधानमंत्री के साक्षर और डिजिटल इंडिया के स्वप्न को आईआईटी-गांधीनगर ने सही अर्थों में सार्थक किया है। जावड़ेकर ने कहा कि इनोवेशन देश की ताकत है और देश की समृद्धि का मार्ग है। शिक्षा के माध्यम से ही समाज शक्तिशाली बनता है। आशा वर्कर की बेटियां भी आईएएस अधिकारी बने, यह शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। मानव संसाधन मंत्रालय भी उन तमाम को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने आईआईटी-गांधीनगर के लोकार्पण के लिए सभी को शुभकामनाएं दी।

इलेक्ट्रॉनिक एंड आईटी, कानून एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आज डिजिटल साक्षर बन रहा है। प्रधानमंत्री ने सत्ता संभाली थी तब उन्होंने डिजिटल इंडिया की कल्पना की थी और देश आज इस दिशा में चल पड़ा है। उन्होंने कहा कि 120 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में 119 करोड़ मोबाइल, 50 करोड़ स्मार्ट फोन और 118 करोड़ आधार कार्ड हैं। करीब 30 करोड़ से ज्यादा गरीबों के जनधन एकाउंट खोले गए हैं और यही डिजिटल इंडिया की प्रोफाइल है। प्रसाद ने ई-गवर्नेंस का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय था जब भारत के प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने कहा था कि दिल्ली से 1 रुपया निकलता है तब गरीब के घर पहुंचते-पहुंचते वह मात्र 15 पैसे रह जाता है। आज परिस्थिति बदल गई है। दिल्ली से 1000 रुपये निकलते हैं और पूरे 1000 रुपये गरीब के घर तक पहुंचते हैं। हमारी सरकार ने बिचौलियों को दूर करके देश के 58 हजार करोड़ रुपये बचाए हैं। कॉमन सर्विस सेन्टर, सीएससी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले देश में 80 हजार सेन्टर थे जबकि आज हमने इसकी संख्या 2,70,000 सेन्टर तक पहुंचाई है। इनमें से 1,17,000 ग्राम पंचायतों में यह केन्द्र कार्यरत हैं और आगामी समय में 2.50 लाख ग्राम पंचायतों में यह केन्द्र कार्यान्वित करने का हमारा संकल्प है। इन सीएससी में कार्यरत युवक-युवतियां डिजिटल सर्विस के संवाहक हैं जो कानूनी मामलों, टेली मेडिसीन एवं अन्य सेवाएं अविरत प्रदान कर रहे हैं।

आज देश में 144 अस्पताल, ई-अस्पताल बने हैं जिनमें 65 लाख लोग सीधा लाभ लेते हैं। करीब 400 मंडियों को भी ई-सेन्टर से जोड़ा गया है और लाखों किसान इसका लाभ ले रहे हैं। इतना ही नहीं, 1.5 करोड़ बालकों को ई-स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। आगामी समय में 6 करोड़ परिवारों को डिजिटल साक्षर बनाने का संकल्प लिया गया है। प्रसाद ने कहा कि पूरा विश्व परिवर्तन की राह पर है। ऐसे में, आम आदमी के मोबाइल में सरकार होनी चाहिए अर्थात सरकार की तमाम सेवाएं उंगलियों के इशारों पर उपलब्ध होनी चाहिए। पहले देश में मात्र 2 मोबाइल फेक्ट्रियां थी जबकि पिछले तीन वर्ष में इनकी संख्या 104 हो गई है।

उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न्यू इंडिया के निर्माण का संकल्प करके तमाम क्षेत्रों को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ने का प्रयास किया है जिसमें गुजरात भी अपना योगदान प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री ने दीर्घदृष्टि से आईआईटी स्थापित करने का जो स्वप्न देखा था जो साकार हुआ है और उन्होंने ही लोकार्पण किया है जो हमारे लिए गर्व की बात है। गुजरात के विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल बने इसके लिए राज्य में पीडीपीयू यूनिवर्सिटी, फॉरेन्सिक साइंस यूनिवर्सिटी और उच्च स्तरीय लॉ यूनिवर्सिटी भी है। अब आईआईटी-गांधीनगर भी विश्व स्तर पर गुजरात का नाम रोशन करेगी। पटेल ने आईआईटी में अभ्यास करने वाले विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि वह सब उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश की विकास यात्रा में शामिल हों और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास मंत्र को चरितार्थ करने के भरपूर प्रयास करें।

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