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राहुल अगले महीने बन सकते है पार्टी अध्यक्ष

नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह 2019 के आम चुनावों में पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। जानकारों के अनुसार यह राहुल गांधी ने ऐसे ही नहीं कहा है। इसके पीछे उनका आगे का प्लान है। अपने संवाद के दौरान राहुल ने पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने के लिए भी तयारी जताई है। यह भी राहुल की भविष्य की रणनीति का हिस्सा है। सूत्रों की माने तो राहुल अगले महीने कांग्रेस पार्टी की कमान संभाल लेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत अब ठीक नहीं रहती और वह राजनीति में ज्यादा एक्टिव भी नही है। राहुल फिलहाल अपने इमेज मेक-ओवर में लगे हुए है। उन्होंने अमेरिका के संवाद के दौरान खुद को हिंसा का सबसे बड़ा पीड़ित बताया और साथ ही अपने पिता के वक्त हुए सिख दंगो को भी गलत ठराया।

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि 2012 के बाद से कांग्रेस अहंकारी हो गई थी। ऐसा कहकर उन्होंने पूरा इल्जाम पार्टी पर डाला और खुद अलग हो गए। उन्होंने हाल ही में महाराष्ट्र का भी दौरा किया और वहां किसानो से बात की. मराठवाड़ा में उन्हें लोगों का भी पूरा समर्थन मिला। वह ज़मीनी स्थर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। राहुल गांधी 2019 में एकजुट विपक्ष का नेता बनना चाहते है। कुछ महीनों पहले तक नीतीश यह चाहते थे मगर उनके भाजपा के साथ जाने के बाद राहुल यह मौका छोड़ना नहीं चाहते। वह चाहते है कि 2019 में विपक्ष एक मत से उन्हें ही नेता घोषित करें। राहुल और उनकी टीम जानती हैं कि, कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है और पार्टी के नेता होने के साथ ही उनको विपक्ष के नेता के तौर पर बाकी विपक्षी दलों में स्वीकार्य होना होगा। राहुल यह बात समझ गए है कि तमाम राज्यों में अब क्षेत्रीय दलों की कमान नई पीढ़ी के हाथो में है। इसके चलते वह क्षेत्रीय नेताओं से संवाद बना रहे है। कई राज्यों में मोदी विरोधी नेता हैं, वो उन सभी को एक करने में जुटे हुए है।

बिहार में आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव भी अपने बेटों को प्रमोट करने में लगे हुए है। राहुल को तेजस्वी और तेज प्रताप से परहेज नहीं है। लालू को भी राहुल को ही नेता मानना होगा। 2019 में कांग्रेस लालू की पार्टी के साथ मिलकर चुनावी दंगल में उतरेगी। आंध्र प्रदेश में राहुल की कोशिश है कि या तो दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी के बेटे जगन्मोहन को दुबारा कांग्रेस में लिया जाया या उनकी पार्टी के साथ गठबंधन किया जाए। तमिलनाडु में राहुल लगातार करूणानिधि के बेटे स्टालिन के संपर्क में है। करूणानिधि की उम्र 90 के पार हो गई है और अब पार्टी की कमान स्टालिन के हाथों में ही है। उत्तरप्रदेश में राहुल पहले ही अखिलेश के साथ गठबंधन कर चुके है। वह यह भी चाहते है कि मायावती भी उनके साथ जुड़ जाए। 2014 आम चुनावों में बीजेपी को यूपी में सभी पार्टियों के अलग चुनाव लड़ने से फायदा मिला था। राहुल सभी भाजपा विरोधियों को एक मंच पर लाना चाहते हैं। महाराष्ट्र में भाजपा की बढती ताकत से कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना तीनो परेशान है। कांग्रेस और एनसीपी का गठबंधन स्वबविक है। वहीं राहुल भाजपा का प्रभाव कम करने के लिए शिवसेना को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे भी सकते है और ले भी सकते है। बंगाल में भी राहुल कोशिश कर रहे है कि सीपीएम और ममता के साथ मिलकर 2019 आम चुनावों में उतरे।

राहुल की हाल के दिनों में सीताराम येचुरी से नजदीकी बड़ी है और ममता बैनर्जी भी सूबे में भाजपा से परेशान है। राहुल और उनकी टीम अब यह बात जान चुकी है कि अगर मोदी को हराना है तो क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलना होगा। अकेले मोदी से जीत पाना नामुमकिन है।

 

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