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हालिया बारिश से फिर जिंदा हुई अर्कावती नदी

बेंगलुरु (ईएमएस)। सूखे और अतिक्रमण के कारण दशकों पहले लुप्त हो गई अर्कावती नदी हालिया वर्षा के बीच फिर से जिंदा हो गई है। पिछले दो दशकों से इंजिनियर चंद्रशेखर बी ताराबनाहल्ली के नजदीक बेंगलुरु-तुमकुर रेलवे लाइन के नीचे धूल भरी सड़क का इस्तेमाल करते थे। वह उनका पसंदीदा रास्ता था, क्योंकि इस रास्ते से जाने पर 15 किलोमीटर की दूरी कम हो जाती थी। पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद वह इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि वहां पानी भर गया है।

हालांकि, वह अन्य लोगों की तरह इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि यह दरअसल अर्कावती नदी का मार्ग है, जो बेंगलुरु के पानी का बड़ा स्रोत है। सूखे और अतिक्रमण के कारण आसपास रहने वाले लोग तो कब का भुला बैठे हैं कि यहां पर कभी नदी हुआ करती थी। अर्कावती नदी कावेरी की सहायक नदी है। बारिश का कमाल है कि यह नदी एक बार फिर से जीवित हो उठी है। अर्कावती नदी के किनारे बसे गांव तोरनागासांद्रा निवासी वाई लोकेश बताते हैं, ‘मुझे नहीं पता कि यह नदी है। मुझे लगता था कि यह एक नाला है। पिछले तीन दिनों से यहां पानी बहते देख मैं हैरान हूं। अर्कावती के पुनरूद्धार में जुटे मंजूनाथ ने कहा मैं जलधारा देख कर हैरान हूं। पिछले दो दशकों में मैंने कभी भी नदी को उफान पर नहीं देखा।

नदी का पुनर्जीवित होना वास्तव में एक अच्छी खबर है। विशेषकर उत्तरी और पश्चिमी बेंगलुरु के लिए, जहां पानी सतह से 1200 फुट नीचे भी ठीक से नहीं मिलता। पूर्व भूगर्भशास्त्री और नदी विशेषज्ञ वाई लिंगाराजू ने कहा, ‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारी बारिश में नदी में प्रवाह हो सकता है। हालांकि, यह काफी नहीं है, क्योंकि इससे मिट्टी का क्षरण हो सकता है। हमने कुमुदवती (शिवगंगा से निकलने वाली नदी) में हमने रिचार्ज और इनजेक्शन कुएं बनाए हैं। ये कुएं वॉटर टेबल को तीन से चार मीटर तक ऊपर ला सकते हैं। अगर अर्कावती के साथ यही प्रयोग किया गया तो यह शहर के लिए अच्छा रहेगा।’

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