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जिन्ना का वो दस्तावेज जो बदल सकता था भारत का इतिहास 

नई दिल्ली (ईएमएस)। जिन्ना के यदि एक राज का खुलासा हो जाता है तो भारत पाकिस्तान के बंटवारे जैसी दु:खद ऐतिहासिक घटना से बचा जा सकता था। जिन्ना की बेटी तक को इस बारे में उनकी मौत के बाद पता चला।

पाकिस्तान हर साल ११ सितंबर को अपने संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की पुण्यतिथि मनाता है। वे जिन्ना जिनकी जिद के कारण भारत के दो टुकड़े हुए। पाकिस्तान का निर्माण उनका सपना था। लेकिन वे अपने सपनों के पाकिस्तान में सिर्फ १३ महीने ही रह सके। ११ सितंबर, १९४८ को जिन्ना का ७२ साल की उम्र में निधन हो गया था। उनकी मौत टीबी से हुई थी। उस समय गंभीर मानी जाने वाली जिन्ना की इस बीमारी का पता बहुत चुनिंदा लोगों को ही था। इनमें जिन्ना के डॉक्टर जाल आर। पटेल और उनकी बहन फातिमा भी शामिल थीं।

जिन्ना जानते थे कि यदि उनके हिन्दू दुश्मन को पता चल गया कि वे मरने वाले हैं तो उनका पूरा राजनीतिक दृष्टिकोण बदल जाएगा। वे उनके कब्र में पहुंचने का इंतजार करेंगे और फिर मुस्लिम लीग के नेतृत्व में नीचे के ज्यादा नरम नेताओं के साथ समझौता करके उनके सपनों की धज्जियां उड़ा देंगे।

यदि अप्रैल, १९४७ में लुई माउंटबेटन, जवाहरलाल नेहरू या महात्मा गांधी को बहुत ही असाधारण ढंग से जिन्ना द्वारा छुपाकर रखे इस रहस्य का पता होता, तो विभाजन का खतरा टाला जा सकता था। यह रहस्य फिल्म के एक टुकड़े पर एक अटल सत्य की तरह अंकित था, उस फिल्म पर जो एशिया के इतिहास की दिशा को बदल सकती थी।इस रहस्य को इतना छिपाकर रखा गया कि अंग्रेजों की पुलिस भी इसका पता नहीं लगा सकी।

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