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एक्शन वीडियो गेम खेलने से हो जाती है ग्रे मैटर में कमी

टोरंटो (ईएमएस)। अगर आप बहुत ज्यादा एक्शन वीडियो गेम खेलते हैं, तो सावधान हो जाइए। इससे आपके दिमाग के ग्रे मैटर (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का मुख्य अवयव) में कमी आ सकती है। इस कमी से तनाव, स्किजोफ्रेनिया (एक प्रकार का पागलपन) और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि एक्शन गेम खेलने के आदी लोगों के हिप्पोकैम्पस में ग्रे मैटर कम होता है। हिप्पोकैम्पस, दिमाग का ऐसा बड़ा हिस्सा होता है, जो अतीत के अनुभवों को याद रखने के लिए जिम्मेदार होता है। पहले के कई अध्ययनों ने दिखाया था कि हिप्पोकैम्पस में कमी से व्यक्ति में मस्तिष्क संबंधी बीमारियां पैदा होने का खतरा रहता है। इससे पोस्ट ट्रॉमेटिक -स्ट्रेस डिस्ऑर्डर (पीटीसीडी), अल्जाइमर, स्किजोफ्रेनिया और तनाव जैसी बीमारियां हो सकती है। एसोसिएट प्रोफेसर ग्रेग वेस्ट ने बताया कि वीडियो गेम्स से दिमाग की संज्ञानात्मक प्रणाली को लाभ मिलता है। यह विशेष तौर पर विजुअल अटेंशन और शॉट टर्म मेमोरी से संबंधित है। ऐसे सबूत भी है कि इससे हिप्पोकैम्पस संबंधित खतरे पैदा होते हैं।

शोधकर्ताओं ने 100 लोगों पर प्रयोग के दौरान उन्हें कई तरह के एक्शन गेम 90 घंटे तक खेलने को दिए। इनमें 51 पुरुष थे जबकि 46 महिलाएं थीं। शोधकर्ताओं की टीम ने गेम खेलने के आदी लोगों का दिमाग स्कैन करके उसकी तुलना नहीं खेलने वालों लोगों से की। उन्होंने पाया कि गेम के आदी लोगों के दिमाग में ग्रे मेटर की कमी थी। इसके बाद उन्होंने इसके खतरे को लेकर दो अध्ययन किए, जिसमें पाया कि गेम खेलने से दिमाग में बदलाव होता है। यह अध्ययन मॉलीक्यूलर साइकियेट्री जर्नल में छपा है।

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