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पिता के हित, शेयरधारकों के हित से ज्यादा ब़डे़ नहीं : गौतम सिंघानिया

नई दिल्ली (ईएमएस)। रेमंड ग्रुप के संस्थापक विजयपत सिंघानिया ने अपने बेटे गौतम सिंघानिया पर आरोप लगाया कि उसने उन्हें पैसे-पैसे के लिए मोहताज कर दिया है। कभी 12000 करोड़ रुपए की कंपनी के मालिक रहे विजयपत सिंहानिया ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जेके हाउस में अपना हिस्सा मांगा है। उनके पुत्र और रेमंड के चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने कहा कि उनके पिता के हित, कंपनी के शेयरधारकों के हित से बड़े नहीं हो सकते।

गौतम सिंघानिया ने कहा कि बेटे और रेमंड के चैयरमैन के तौर पर उनकी भूमिकाएं अलग-अलग हैं। एक बयान में उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों के तहत प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन शेयरधारकों ने प्रस्ताव नामंजूर कर दिया। उन्होंने कहा है कि मामला कोर्ट में है, इसलिए ज्यादा नहीं कह सकते। लेकिन उन्होंने कहा कि बेटे के तौर पर उन्होंने बातचीत कर मामले को सुलझाने की पूरी कोशिश की। पूरा विवाद जेके हाउस को लेकर है। यह बिल्डिंग 1960 में बनी थी और तब 14 मंजिला थी। बिल्डिंग के चार ड्यूप्लेक्स रेमंड की सहायक कंपनी पश्मीना होल्डिंग्स को दिए गए।

उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि सिंघानिया ने कंपनी में अपने सारे शेयर फरवरी 2015 में बेटे के हिस्से में दे दिए थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन शेयर्स की कीमत करीब 1000 करोड़ रु. थी, लेकिन अब गौतम ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। उनसे गाड़ी व ड्राइवर भी छीन लिए गए हैं। दुनियाभर में सूटिंग और शर्टिंग के लिए मशहूर रेमंड की नींव 1925 में रखी गई थी। इसका पहला रिटेल शोरूम 1958 में मुंबई में खुला था। विजयपत सिंहानिया ने इस कंपनी की कमान 1980 में संभाली थी.

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