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डोकलाम विवादः भूटान के समर्थन से भारत को बल

डोकलाम विवाद पर अब तक पूरा अपडेट जान लें

भूटान ने कहा :चीन का हिस्सा नहीं है डोकलाम
पिछले दिनों चीनी अधिकारियों ने कहा कि भूटान का दिक्कत नहीं

नई दिल्ली (ईएमएस)। पिछले कई दिनों से जारी डोकलाम विवाद में भूटान के बयान से भारत का बल मिला है। भूटान सरकार ने चीन के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि भूटान ने इस बात को स्वीकार किया है कि डोकलाम का क्षेत्र उसका अपना इलाका नहीं है। भूटान सरकार के अधिकारी ने कहा है कि डोकलाम पर भूटान की स्थिति बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा कि भूटान ने ऐसा कभी कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि चीन का ये दावा बिल्कुल झूठा है और डोकलाम चीन का हिस्सा नहीं है। इसके बाद साफ हो जाता हैं कि ड्रैगन किस तरह के हथकड़े अपना रहा है।

बता दें कि चीन की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बेबुनियाद दावा किया कि भूटान ने इस बात को स्वीकार किया था कि डोकलाम का क्षेत्र उसका अपना इलाका नहीं है। इस इलाके में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध चल रहा है। सीमा मुद्दे पर चीन की शीर्ष राजनयिक वांग वेनली ने यहां आए एक भारतीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल से कहा कि भूटान ने बीजिंग को राजनयिक माध्यमों से इस बात से अवगत कराया है कि जिस इलाके को लेकर गतिरोध जारी है वो उसका इलाका नहीं है। हालांकि उन्होंने इस दावे के लिए कोई साक्ष्य नहीं मुहैया किया।लेकिन चीनी अधिकारी ने दावा किया था कि भूटान घोषित रुख और कार्रवाइयों से पूरी तरह से अलग है। भूटान ने चीन सरकार के समक्ष प्रदर्शन कर उस पर एक द्विपक्षीय संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। दरअसल इससे पहले चीन ने 16 जून को डोकलाम इलाके में एक सड़क बनाने की कोशिश की थी।वांग ने कहा,घटना के बाद भूटान ने हमसे स्पष्ट कर दिया कि जहां घुसपैठ हुई, वो स्थान भूटान का क्षेत्र नहीं है। चीनी अधिकारी यह भी झूठा दावा कर दिया कि भूटान को ये बहुत अजीब लगा कि भारतीय सैनिक चीनी सरजमीं पर हैं। उन्होंने बताया कि उनका ये विचार भूटान की सरकारी मीडिया और कानूनी ब्लॉगों से मिली सूचना से आया है जो कहीं अधिक विश्वसनीय सूचना है।

गौरतलब है कि 30 जून को भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था, ’16 जून को चीनी सेना के एक कंस्ट्रक्शन दल ने डोकलाम इलाके में प्रवेश किया और एक सड़क बनाने की कोशिश की। हमें ये समझ में आया है कि रॉयल भूटान आर्मी की एक गश्ती टीम ने इस एकपक्षीय हरकत से उन्हें रोकने की कोशिश की।’इसके बाद भारत ने इस बात का भी जिक्र किया था कि भूटानी विदेश मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि भूटान की सरजमीं के अंदर एक सड़क का निर्माण भूटान और चीन के बीच हुए 1988 और 1998 के करार का सीधे तौर पर उल्लंघन है। ये इन देशों के बीच सीमा निर्धारण की प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। उन्होंने 16 जून 2017 से पहले की यथास्थिति पर लौटने का उनसे अनुरोध किया। वांग ने कहा कि भूटान भारत और चीन के सैनिकों की ओर से इसकी जमीन से की गई कार्रवाइयों पर गौर कर रहा है। भूटान का चीन से कोई सीधा राजनयिक संबंध नहीं है और वो नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास के जरिए बीजिंग से संपर्क रखता है। भूटान और चीन अपने सीमा विवादों को सुलझाने के लिए 24 दौर की वार्ताएं कर चुके हैं जबकि भारत और चीन के बीच इस आशय की 19 दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। वांग ने कहा कि 14 देशों में भारत और भूटान ऐसे दो देश हैं जिनसे चीन अपना सीमा विवाद हल करना चाहता है। चीन ने 12 देशों के साथ करीब 22,000 किमी का सीमा विवाद सुलझाया है।

चीन 100 मीटर हटने को तैयार, भारत 250 मीटर पीछे हटाने पर अड़ा
चीनी मीडिया लगातार दे रहा युद्ध् की धमकी

नई दिल्ली (ईएमएस)। पिछले एक माह से जारी भारत-चीन सीमा विवाद में अब चीन पीछे हटने को तैयार हो गया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी अनुसार चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी डोकलाम के विवादित प्वाइंट से 100 मीटर पीछे हटने को तैयार है, लेकिन भारत उसे 250 मीटर पीछे हटाने पर अड़ा हुआ है। वहीं, दूसरी ओर चीनी मीडिया लगातार भारत को युद्ध् की धमकी दे रहा है। वहीं इसके उल्टे चीन के सरकारी अखबार कह रहे हैं कि डोकलाम से भारत को अपनी सेना हटानी होगी, वरना उसे युद्ध झेलना पड़ेगा। चीनी अखबार यहां तक कह दिया हैं कि डोकलाम विवाद पर भारत के साथ सैन्य संघर्ष की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। इसके अखबार के साथ ही कई चीनी अधिकारी भारत को धमकी देने के काम में ही लगे हुए हैं, चीनी सीमा एवं महासागर मामलों के डिप्टी डायरेक्टर जनरल वांग वेनली सीमा से कश्मीर और उत्तराखंड में घुसने तक की धमकी दे चुके हैं। हालांकि डोकलाम की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। फिलहाल चीनी सेना डोकलाम में 100 मीटर पीछे हटने को राजी हो गई है, लेकिन भारतीय सेना उसको 250 मीटर पीछे हटने को कह रही है।
भारत की ओर से चीन को कहा गया है कि वह विवादित प्वाइंट से 250 मीटर पीछे हटे, जिसके बाद ही भारतीय सेना पीछे जाएगी। चीन ने कहा कि वह 100 मीटर पीछे हटने को तैयार है। लिहाजा भारत को अपनी पूर्व स्थ्ति पर जाना चाहिए, इससे साफ है कि दोनों देशों की सेनाएं संघर्ष की बजाय विवादित क्षेत्र से पीछे हटने जा रही हैं।

इस बीच डोकलाम पर चीन के सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और 100 मीटर पीछे हटने की विरोधाभाषी रिपोर्ट एक साथ सामने आई हैं। पहली रिपोर्ट में कहा गया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने डोकलाम पर 80 टेंट लगा दिए हैं।जहां पर चीनी सेना ने टेंट लगाया है,वह स्थल उत्तर डोकलाम के पोस्ट डोलाम पठार से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। इस इलाके में चीनी सैनिकों की संख्या आठ सौ से कम है यानी चीन ने यहां पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की पूरी बटालियन तैनात नहीं की है। इतना ही नहीं, चीन ने विवादित इलाके में 350 भारतीय सैनिकों के मुलाबले करीब 300 चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी सैनिक तैनात किए हैं। ये भारतीय सैनिक 30 टेंट लगाए हुए हैं।

डोकलाम विवाद में भारतीय यात्रियों का हुआ अपमान

बीजिंग। भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर चल रहे गतिरोध के बाद चीन अब गंदी हरकतों पर उतर आया है। बात दे कि भारतीय यात्रियों के लिए चीन के हवाई अड्डों पर पर चीनी कर्मचारियों की रवैया बदल दिया है। इस बारे में जानकारी देते हुए उत्तरी अमरीकी पंजाबी एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लिखे पत्र में इस बारे में अवगत करवाते चीनी समकक्ष के समक्ष इस मामले को उठाने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि 6 अगस्त को शंघाई पुडोंग हवाई अड्डे पर अपने प्रवास के दौरान उन्होंने देखा कि हवाई अड्डे का स्टाफ भारतीय यात्रियों से असभ्य व्यवहार कर अपमानित कर रहे हैं । चाहल ने श्रीमती स्वराज से अनुरोध किया है कि वह भारतीय यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी करें ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के दौरान चीन के रास्ते यात्रा करने से परहेज कर सकें। अपने पत्र में चहल ने आरोप लगाया है कि भारतीय यात्रियों के फ्लाइट बदलते समय चीनी हवाईअड्डे के कर्मचारियों द्वारा यात्रियों को व्हील चेयर का इस्तेमाल तक करने से रोका जा रहा है।

विध्वंसकारी होगा भारत-चीन के बीच युद्ध : यूएई
नई दिल्ली (ईएमएस)। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्री अनवर गरगेश ने कहा कि भारत व चीन के बीच युद्ध हुआ, तो वह बेहद विध्वंसकारी साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस विवाद का समाधान कूटनीतिक स्तर पर किया जाना चाहिए। यही एशिया समेत पूरे विश्व के हित में है। गरगेश ने भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात के बाद यह बात कही।

उन्होंने कहा कि भारत व चीन दोनों की महाशक्ति हैं। इनके बीच टकराव नहीं होना चाहिए। कश्मीर में पाक के अनाधिकृत हस्तक्षेप पर उनका कहना था कि वह किसी भी ऐसी कार्रवाई की निंदा करते हैं, जिसमें आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खाड़ी में यही काम कतर कर रहा है। सुषमा स्वराज ने इस दौरान गरगेश से आग्रह किया कि यूएई में काम कर रहे भारतीयों के हितों का ध्यान रखें।

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