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तिहाड़ के कैदियों के हाथ में होगा पेट और ब्रश,तैयार होगी पेटिंग

नई दिल्ली (ईएमएस)। हुनर सबके पास होता हैं फिर वहां सजा कट रहा कैदी ही क्यों ना हो, इसी हुरान को तराशने के लिए अब देशभर के मशहूर चित्रकार जल्द ही तिहाड़ में कैदियों को पेंटिंग की बारीकियां सिखाएंगे। इसके बाद ललित कला अकादमी के रवींद्र भवन में एक महीने तक कैदियों के बनाए चित्रों की प्रदर्शनी लगेगी। इसबारे में जानकारी देते हुए तिहाड़ के डीजी सुधीर यादव का कहना है कि कला थैरेपी की तरह काम करती है, इससे कैदियों का रचनात्मक विकास होगा और उनकी मनोदशा में सुधार आएगा। जब कैदियों के काम की प्रशंसा होगी और उन्हें सराहना मिलेगी तो जेल से छूटने के बाद वो आसानी से मुख्यधारा के समाज से जुड़ पाएंगे। इसके साथ ही इस सात दिवसीय पेंटिंग कार्यशाला में चित्रकारी में रुचि रखने वाले दूसरे राज्यों के जेलों में बंद कैदियों को भी बुलाया जाएगा. कार्यक्रम का आयोजन 19 अगस्त से लेकर 25 अगस्त तक होगा, इसके बाद 26 अगस्त से 25 सितंबर के बीच कैदियों के बनाए चित्रों की प्रदर्शनी लगेगी।

डीजी सुरेंद्र यादव का कहना है कि जेल के बाद सभी कैदी भी बेहतर वक्त बिताना चाहते हैं,सालों से जेल बंद रहने की वजह से उनकी मानसिक स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। हमारे देश में अगस्त आजादी के जश्न का महीना है। ऐसे में हम कैदियों को कला और कौशल के माध्यम से कुछ वक्त के लिए मानसिक शांति प्रदान करना चाहते हैं, इसमें ललित कला अकादमी हमारा सहयोग कर रही है। इस बेहतर पहल के बारे में बताते हुए अकादमी के अध्यक्ष सीएस कृष्णा सेट्टी का कहना है कि चित्रकला में इंसान अपने जज्बातों, आवेगों, संवेदनाओं और समाज के बदलते हालात को उकेरता है, इस कार्यक्रम के जरिए लोगों को पता चलेगा कि जेल की कोठरी में बंद कैदी क्या सोचता है, समाज को लेकर उसके मन में क्या उथल-फुथल चल रही है? काम की प्रशंसा और आत्मविश्वास बढ़ने से कैदियों में सुधार आएगा और जेल से छूटने के बाद वो मुख्यधारा के समाज का हिस्सा बन बेहतर जीवन जी पाएंगे। कृष्णा शेट्टी ने बताया कि ललित कला अकादमी तिहाड़ के अंदर दो आर्ट गैलरी भी खोल रही है, इस पर काम चल रहा है,एक गैलरी कैदियों के लिए होगी जबकि दूसरी गैलरी आम जनता के लिए होगी।

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