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दीव दमण को गुजरात में मिला दिया जाना चाहिए : हाईकोर्ट

अहमदाबाद| गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में शराब बंदी के असरकारक अमल के लिए केन्द्र सरकार को दीव दमण को गुजरात में मिला देना चाहिए| अदालत में विचाराधीन 3.99 लाख मामलों में से 55 हजार केस शराब से संबंधित होने से गुजरात हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपना लिया है| हाईकोर्ट का यह भी मानना है कि गुजरात में शराब बंदी का कड़ाई से अमल नहीं किया जा रहा| राज्य में मद्यनिषेध कानून कागजी घोडा बनकर रह गया है|
दमण के वाइन शोप और उसकी एजेंसी मालिकों के खिलाफ मद्यनिषेध के तहत दर्ज मामले रद्द करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट में अपील की गई थी| जिसमें वाइन शोप मालिकों की दलील थी कि दमण में शराबबंदी नहीं हैं और उनके पास शराब बेचने का लाइसंस है| यदि उनके यहां से कोई शराब अन्य राज्यों में ले जाता है तो उसकी जानकारी उन्हें नहीं होती| अन्य राज्यों में बेची गई शराब के साथ कोई पकड़ा जाता हो तो उसकी जवाबदेही भी उनकी नहीं है| इन पहलुओं को देखते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द किया जाना चाहिए|
गुजरात हाईकोर्ट ने वाइन शोप मालिकों खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी दलीलों और याचिका को खारिजकर दिया| साथ ही हाईकोर्ट ने कहा अब समय आ गया है कि केन्द्र सरकार को दीव दमण को गुजरात में मिला देना चाहिए| ऐसा करने से शराब बंदी के संशोधित कानून का अमल कराने में आसानी होगी| केन्द्र सरकार को चाहिए कि देर होने से पहले इस मुद्दे पर गौर करते हुए दीव दमण को केन्द्र शासित प्रदेश मुक्त कर गुजरात का हिस्सा बना देना चाहिए| गुजरात में जब तक सरलता से शराब लाने का रास्ते बंद नहीं होंगे तब तक राज्य में शराब बंदी का कड़ाई से अमल संभव नहीं है|

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