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प्रायवेट कंपनियां खुद के टर्मिनल्स से चल सकेगी मालगाड़ी

कंपनियों को होगा फायदा, रेलवे को मिलेगा राजस्व
नई दिल्ली ।इंडियन रेलवे जल्द प्राइवेट कंपनियों को अपने प्राइवेट टर्मिनल्स से मालगाड़ी चलाने की इजाजत दे सकता है। इससे देश के रेलवे नेटवर्क पर भारतीय रेल की मोनोपॉली खत्म हो सकती है। सीमेंट,स्टील,ऑटो,लॉजिस्टिक्स,अनाज, केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स सेक्टर की कंपनियों ने रेलवे की स्पेशल फ्रेट ट्रेन ऑपरेशंस स्कीम के तहत अपनी फ्लीट चलाने में दिलचस्पी दिखाई है। इसकी जानकारी एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने दी है। अगर यह स्कीम सफल रहती है तो आगे चलकर प्राइवेट पैसेंजर ट्रेन चलाने की जमीन भी तैयार हो सकती है। टाटा स्टील, अडानी एग्रो, कृभको और कई अन्य प्राइवेट कंपनियों के पास पहले से ही अपने टर्मिनल्स हैं। इस साल रेलवे ने 55 प्राइवेट फ्रेट टर्मिनल्स को मंजूरी दी है, जिनको बनाने में 5,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया, ’इन प्राइवेट टर्मिनल्स के बन जाने पर 2-2.5 करोड़ टन की लोडिंग कपैसिटी का एडिशन होगा।अभी कोयले के अलावा सभी कमोडिटी की मांग बढ़ रही है। इसलिए कई कंपनियां अपने प्लांट्स के पास या दूसरी जगह प्राइवेट टर्मिनल्स बनाने में दिलचस्पी दिखा सकती हैं।उन्होंने बताया कि ये कंपनियां अपनी ट्रेन भी चले सकेंगी।
वित्त वर्ष 2017 में भारतीय रेल ने संशोधित लक्ष्य से बेहतर नतीजे हासिल किए थे। उसकी लोडिंग 110.7 करोड़ टन रही थी, जो ऑल टाइम रिकॉर्ड है। इस वित्त वर्ष में रेलवे मिनिस्टर सुरेश प्रभु ने 120 टन लोडिंग का लक्ष्य रखा है। फ्रेट ट्रेन ऑपरेशंस स्कीम के तहत कंपनियां भारतीय रेलवे से रैक लीज पर ले सकती हैं या अपने रैक बनवा सकती हैं और उन्हें अपनी सहूलियत के हिसाब से मौजूदा रेल नेटवर्क पर चला सकती हैं। वे इन्हें अपने प्राइवेट फ्रेट टर्मिनल्स से ऑपरेट कर सकती हैं। हालांकि, ट्रेन ऑपरेशंस को रेलवे मैनेज करता है और कंपनियों को उसे ट्रैक, यूसेज और दूसरे चार्जेज देने पड़ते हैं। इस बारे में अधिकारिक सूत्र ने बताया, ’हम जल्द रेल डिवेलपमेंट अथॉरिटी बनाने जा रहे हैं, जो किराए के बारे में सिफारिश देगी। इससे इन कंपनियों के लिए यूसेज चार्ज तय करने का काम पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। इससे माल ढुलाई में रेलवे का एकाधिकार भी खत्म होगा।’ भारतीय रेल धीरे-धीरे कई क्षेत्रों में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। उसने हाल ही में दार्जिलिंग, कालका-शिमला, माथेरान और नीलगिरि जैसे आइकॉनिक हिल रेलवे को ऑपरेट करने के लिए प्राइवेट कंपनियों को दिया है।

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