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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पीपी पांडेय ने दिया इंचार्ज डीजीपी पद से इस्तीफा

अहमदाबाद | सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए गुजरात के प्रभारी पुलिस महानिदेशक पीपी पांडेय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया| पिछले काफी समय से इंचार्ज डीजीपी के तौर पर पीपी पांडेय सेवा दे रहे थे| पांडेय के इस्तीफे के साथ नए डीजीपी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं|
इशरत जहां फेक एन्काउंटर केस के आरोपी में से एक और गुजरात के इंचार्ज डीजीपी पीपी पांडेय की नियुक्ति को लेकर शुरु हुआ विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था| सुप्रीम कोर्ट की सख्त रुख को देखते हुए पीपी पांडेय को अपना पद छोने को मजबूर होना पड़ा| 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी पीपी पांडेय को इशरत जहां फेक एन्काउन्टर के आरोप में कुछ दिनों जेल में बिताने के बाद नियमित जमानत मिली थी और अप्रैल 2016 को डीजीपी के स्थान पर पीपी पांडेय को इंचार्ज डीजीपी बनाया गया था| आधिकारिक रूप से पीपी पांडेय 31 जनवरी 2017 को निवृत्त हो चुके हैं| परंतु सरकार ने उन्हें तीन महीने के एक्सटेंशन दिया गया था| पीपी पांडेय की नियुक्ति को पूर्व आईपीएस अधिकार जूलियो रिबेरो ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी| मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार नोटिस जारी कर जवाब मांगा था| जूलियो रिबेरो ने अपनी याचिका में कहा था कि पीपी पांडेय इशरत जहां समेत कई समेत कई मामलों के आरोपी हैं, इसके बावजूद गुजरात सरकार ने निवृत्ति के बाद भी उन्हें इंचार्ज डीजीपी नियुक्त कर दिया| नियुक्ति से पांडेय इन सभी मामलों की जांच के प्रभारी और गवाही देने वाले पुलिस अधिकारियों के मुखिया हो गए हैं| जूलियो ने पीपी पांडेय को डीजीपी पद से हटाने की यह कहते हुए मांग की कि उनके रहते विचाराधीन मामले प्रभावित हो सकते हैं|
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार की ओर पैरवी कर रहे वकील तुषार मेहता की दलील दी कि पीपी पांडेय पहले ही निवृत्त हो चुके हैं और फिलहाल वे एक्सटेंशन पर हैं| तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील कि कि पांडेय को अप्रैल महीन तक कार्यकारी पुलिस महानिदेशक पद पर यथावत रखा जाए| हालांकि अपनी दलील दौरान तुषार मेहता को अहसास हुआ कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट कोई कड़ा फैसला ले सकती है| सुप्रीम कोर्ट कोई कड़ा फैसला करे उससे पहले ही वकील ने अदालत को बताया कि पांडेय को उनके पद से मुक्त किया जाएगा|
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही पीपी पांडेय ने गुजरात सरकार को पत्र लिखकर इंचार्ज डीजीपी के पद से मुक्त करने की मांग की थी| पत्र में पांडेय ने कहा था कि उनके एक्सटेंशन को कुछ असंतुष्ट लोगो ने अकारण सुप्रीम कोर्ट तक घसीटा है| ताकि गुजरात और भारत सरकार की बदनामी हो| इस विवाद को खत्म करने और सरकार को शर्मनाक स्थिति से बचाने के लिए वे फौरन अपने पद से मुक्त होना चाहते हैं|

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