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एम्स में नर्सो की हड़ताल से मरीज हुए बेहाल 

नई दिल्ली ।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की नर्सें सातवें वेतन आयोग कि सिफारिश को लेकर शुक्रवार को हड़ताल पर थे। इस वजह से एम्स में आने वाले मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नर्सों की हड़ताल की वजह से इमर्जेंसी से लेकर सर्जरी तक पर असर पड़ा, लगभग 5000 हजार नर्सों के एक साथ स्ट्राइक पर जाने से एम्स प्रशासन भी सकते में था। गुरुवार को एम्स प्रशासन और नर्सों के बीच हुई बातचीत फेल हो गई थी,इस वजह से शुक्रवार को नर्स यूनियन ने हड़ताल पर जाने का फैसला लिया था। एम्स नर्सिंग यूनियन के अध्यक्ष ने बताया कि हम एक साल से मांग कर रहे हैं,सातवें वेतन आयोग को लेकर नर्सों के साथ सरकार का व्यवहार सही नहीं रहा है, इन्ही कारणों से हड़ताल को मजबूर हैं,अगर फिर भी हमारी मांगे नहीं मानी गई तो हम 27 मार्च से अनश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं।
हादसा पीड़ितों को भर्ती नहीं किया गया,इस वजह से हादसा पीड़ित, कैंसर, हार्ट अटैक, मस्तिष्क आदि की गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को परेशान होना पड़ा, इस हड़ताल से इमरजेंसी सेवा व ऑपरेशन थियेटर ठप रहे, एम्स ट्रॉमा सेंटर में भी चिकित्सा सेवाएं ठप रहीं। एम्स प्रशासन का कहना है कि मांगों को पूरा करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सिफारिश की गई है फिर भी नर्सिग कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर चले गए,एम्स प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद शाम को नर्सिग यूनियन ने हड़ताल वापस ले ली, एम्स में सुबह से शाम करीब 5.30 बजे तक इमरजेंसी में मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। मरीजों को लेकर पहुंचने वाले एंबुलेंस व वाहनों को सुरक्षा गार्डो ने बैरिकेड लगाकर इमरजेंसी ब्लॉक से करीब 100 मीटर दूर रोक दिया।मरीजों का रजिस्ट्रेशन भी बंद था,इस वजह से मरीज निराश होकर सफदरजंग और दूसरे अस्पतालों में जाने को मजबूर हुए।

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