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टेक्सटाइल, डायमंड और ज्वेलर्स सहित अन्य को आयकर का समन्स

सूरत। नोटबंदी के बाद सबसे बड़ी कागजी कार्रवाई करते हुए आयकर विभाग के इन्वेस्टीगेशन विंग ने असंख्य करदाताओं को समन्स भेजकर कैशबुक की जानकारी मांगी है। बिल्डर, टेक्सटाइल व्यापारी, ऑटो मोबाइल, होटल, डायमंड और केमिकल सहित अन्य क्षेत्रों के बड़े-बड़े व्यापारी समन्स के लपेटे में आए हैं।
नोटबंदी के दौरान राष्ट्रीयकृत, सहकारी और निजी बैंकों में कुल 30 हजार करोड़ रूपए जमा हुए हैं। सूरत में जहां वार्षिक 20 हजार करोड़ का डायरेक्ट-इन डायरेक्ट टैक्स भरा जाता है वहीं बैंकों में जमा राशि अधिकारियों के गले नहीं उतर रही है। खाते में रूपए जमा करने वालों को शुरुआत से ही नोटिस देकर आयकर विभाग ने जांच का संकेत दे दिया था। आयकर विभाग ने 20 दिसंबर तक का आंकड़ा मिलने के बाद समन्स जारी करना शुरु कर दिया है। आयकर के समन्स से सीए आलम में हड़कंप मच गया है। समन्स के लपेटे में शहर का बड़ा वर्ग आ गया है। सीए डेनिस चौकसी का कहना है कि बैंक में जो रकम जमा हुई है उसका खुलासा करना होगा कि रूपए कहां से आए?
समन्स भेजकर 4 दिनों में जवाब मांगा गया है। जानकारी के साथ व्यापारी के उपस्थित न होने पर पेनाल्टी का कानून है। दुबारा समन्स भेजने पर व्यापारी न आए तो अधिकारी इंस्पेक्टर को घर भेज सकते हैं। तीसरी बार भी उपस्थित न होने पर सर्वे हो सकता है। अधिकारी 1 करोड़ से अधिक जमा करने वालों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि समग्र कार्रवाई बैंकों में कालाधन खोजकर टैक्स जमा कराने की है।
समन्स भेजकर करदाताओं से केशबुक की जानकारी मांगी गयी है। अधिकारी यह जानना चाहते हैं कि 7 नवंबर को कितना बैलेंस था और नगदी कहां से आयी?

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