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नोटबंदी से साइटिका का खतरा

नई दिल्ली। नोटबंदी के कारण अब कार्ड से लेन-देन व खरीदारी पर जोर दिया जा रहा है। इससे एक सामान्य व्यक्ति के पर्स में व्रेâडिट व डेबिट कार्ड, लाइसेंस, आईडी, मेट्रो और पेट्रो सहित कई जरूरी कार्ड शामिल हो गए हैं और बटुए का वजन बढ़ता जा रहा है। इससे एक औसत पर्स का वजन बढ़कर साठ से ८० ग्राम तक हो गया है। इस बटुए को अगर आप पैंट के पीछे की जेब में रखते हैं तो इसका असर सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ना तय है। आर्थोपेडिक्स के डॉक्टरों का कहना है कि पैंट के पिछले हिस्से की तरफ जहां बटुए को रखा जाता है, वहां से वूâल्हे की साइटिका नस गुजरती है और बटुआ रखकर बैठने से नस पर लगातार दबाव बनता रहता है। इससे कमर और वूâल्हे में दर्द की शिकायत हो सकती है। उन्होंने बताया कि दो से तीन प्रतिशत मामले डीप वेन थांब्रोसिस (पैर की नसों में सूजन) के रूप में भी सामने आती है। देश में तकरीबन ३० फीसदी लोग साइटिका के शिकार हैं।
पर्स का वजन दिल की धमनियों से कमर और वूâल्हे के रास्ते होते हुए पैर तक खून का संचार करने वाली नस पर दवाब डालता है, जिससे खून का संचार बाधित होता है। यह ाqस्थति लंबे समय तक नसों में सूजन भी बढ़ाती है। एक अनुमान के अनुसार ६० या ७० ग्राम के बटुए को पीछे की जेब में रखकर यदि आप ३० मिनट या इससे अधिक समय तक बैठने के बाद उठते हैं तो कमर में दर्द का एहसास होगा। ऐसे में माइक्रो वॉलेट के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।

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