नई दिल्ली । लंदन खेलों में रजत पदक जीतकर लगातार ओलंपिक में पदक जीतने का रिकार्ड बनाने में कामयाब रहने वाले पहलवान सुशील कुमार विभिन्न ब्रांड के लिये शूिंटग में व्यस्त हैं लेकिन उनका कहना है कि वैâमरे का सामना करने से ज्यादा आसान कुश्ती लड़ना है। सुशील का कहना है कि मैं अपने खेल में माहिर हूं लेकिन वैâमरे का सामना करना थोड़ा मुाqश्कल है। शुरू में यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण था। लेकिन जैसे मैंने अपने खेल में महारथ हासिल कर ली है, वैसे ही मैं वैâमरे से भी निपटने की कोशिश कर रहा हूं। ब्रांड ने उन्हें अलग सोचने के लिये बाध्य कर दिया है तो दिल्ली के इस पहलवान ने अपने दोस्त योगेश्वर दत्त एंड वंâपनी के साथ छत्रसाल स्टेडिम में पुâटबाल मैच खेलने के बाद मैदान से बाहर निकलकर नहीं में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जी नहीं लगता कि अलग बर्ताव करने का यह कोई कारण है। मैं परिवार में ऐसा एक ही हूं इसलिये इस तरह से सोचने का सवाल ही नहीं हैं।
सुशील ने यह भी कहा कि उन्होंने इन प्रायोजकों को हासिल करने में काफी कड़ी मेहनत की है। यह पूछने पर कि क्या पहलवानों को आत्ममुग्धता से बचने की जरूरत है क्योंकि भारतीय मुक्केबाज बीिंजग ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद लंदन खेलों में एक भी तमगा हासिल नहीं कर सके तो सुशील ने कहा कि अगले चार साल भी पिछले वर्षों से अलग नहीं होंगे। सुशील ने कहा कि मैं अपने काम पर पूरी तरह ध्यान लगाये थे, हमने लंदन खेलों के लिये सचमुच काफी कड़ी मेहनत की थी। मुझे नहीं लगता कि आने वाले साल भी कुछ अलग होंगे। हमने पहले भी किया है और मुझे रियो डि जेनेरियो ओलंपिक में ऐसा नहीं करने का कोई कारण नहीं हैं।