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आसाराम के सेवादारों ने किया आत्मसमर्पण

नई दिल्ली। नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में पंâसे आसाराम अब लगता है हताश हो चुके है। कल तक अपनी जमानत के लिए जोर-शोर से हाथपैर मार रहे आसाराम को भी समझ में आ गया है कि उनके लिए बचने का रास्ता इतना आसान नहीं है। यही वजह है इस मामले में अब तक छिपते आ रहे उनके सेवादार भी सरेंडर करने लगे हैं। इसी क्रम में आसाराम के रसोइए प्रकाश और उनके िंछदवाड़ा आश्रम के संचालक शरद चंद्र ने जोधपुर सेशंस कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। कोर्ट ने दोनों को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।आसाराम की गिरफ्तारी के बाद से ही प्रकाश और शरद फरार चल रहे थे। यही नहीं इन्होंने अपनी अग्रिम जमानत के लिए भी कोर्ट में अर्जी डाल रखी थी लेकिन जब आसाराम जमानत लेने के लिए हाईकोर्ट गए तो उन्हें असलियत समझ में आ गई। उनके वकील राम जेठमलानी ने खुद अपनी तरफ से कोर्ट से वक्त मांगा ताकि वो नए सबूत कोर्ट के सामने रख सवेंâ। इससे आसाराम की जमानत अर्जी पर पैâसला एक अक्टूबर तक टल गया है।आसाराम को जमानत न मिलने के पीछे सबसे बड़ा पेंच है इस केस में फरार चल रहे दूसरे आरोपी जैसे प्रकाश, शरद और वार्डन शिल्पी। शिल्पी के भी जल्द सरेंडर की उम्मीद जताई जा रही है क्योंकि उसकी जमानत की अर्जी बुधवार तक के लिए टाल दी गई है।बताया जा रहा है कि १५ अगस्त को जब लड़की के साथ ये घटना हुई उस समय प्रकाश कुटिया के बाहर मौजूद था। प्रकाश को वारदात का अहम गवाह माना जा रहा है। इसके अलावा शिल्पी के कहने पर ही लड़की को िंछदवाड़ा से जोधपुर भेजा गया था। साफ है कि इनके गिरफ्त में आए बिना जांच पूरी नहीं होगी और जब तक जांच अधूरी रहेगी तब तक आसाराम को जमानत मिलना मुाqश्कल है। यही वजह है कि अब तक छुपते फिर रहे आसाराम के राजदार अब खुद सरेंडर कर रहे हैं।

  • कोडवर्ड के जरिए लड़की फंसाते थे आसाराम!

जयपुर। लड़कियों को पंâसाने के लिए आसाराम कोडवड्र्स में बाते करते थे। उनके यह कोडवर्ड सिर्पâ सेवादार ही समझ सकते थे। पुलिस जांच में इन कोडवड्र्स का खुलासा हुआ है।

  • ‘४०० लगाओ`

आसाराम का मोबाइल उसके रसोइए के पास रहता था । हालांकि आसाराम के अलावा कोई भी व्यक्ति उस फोन पर आने वाली कॉल को सुन नहीं सकता था। रसोइया फोन रसीव करके आसाराम के कान पर लगा देता था। दरअसल आसाराम के मोबाइल के आखिरी अंक ‘४००` हैं इसीलिए उन्होंने अपना कोडवर्ड ‘४०० लगाओ` रखा था।

  • ‘समर्पण`

जब आसाराम को कोई लड़की अच्छी लगती थी तो वह सेवकों को ‘समर्पण` का आदेश देते थे जिसका मतलब था लड़की को आसाराम से मिलने के लिए अकेले भेजो। पीड़िता ने भी पुलिस और मजिस्ट्रेट को दिए बयान में कहा है कि उसके बीमार होने के तत्काल बाद छिंदवाड़ा आश्रम के निदेशक शरतचंद ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया और साध्वी बनने की सलाह दे खुद को आसाराम को समर्पित करने के लिए कहा।

  • ‘टॉर्च की रोशनी`

आसाराम ध्यान की कुटिया में अकेले ही रहा करते थे। जब भी किसी को वह ध्यान की कुटिया में बुलाना चाहते थे तो वह आवाज लगाने की बजाए टार्च मारकर उसे बुलाते थे।
आसाराम के बेटे नारायण साईं के निजी सचिव रहे महेंद्र चावला ने भी आसाराम पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए खुलासा किया था कि आसाराम लड़कियों के चयन के लिए भी एक खास तरीका अपनाता था। चावला ने कहा कि आसाराम टार्च की रोशनी से डिपर मारकर या फल पेâंक कर लड़की को सेलेक्ट करता था।

 

  • शिल्पी की जमानत पर सुनवाई टली

नई दिल्ली । यौन उत्पीडन के मामले में आसाराम की सहयोगी और सह-आरोपी फरार वार्डन शिल्पी की अग्रिम जमानत पर सुनवाई टल गई है। इस मामले में अब जोधपुर हाईकोर्ट में २५ सितंबर को सुनवाई होगी।
सह-आरोपी फरार वार्डन शिल्पी की अग्रिम जमानत पर जोधपुर हाईकोर्ट में आज फिर से टाल दी गई है। शिल्पी पुलिस की पहुंच से अभी तक दूर है। इससे पहले जस्टिस निर्मलजीत कौर की अदालत ने १६ सितंबर को सुनवाई करते हुए इस मामले में केस डायरी तलब की थी। कोर्ट की मांग के मुताबिक छिंदवाड़ा और अहमदाबाद आश्रम में हुई जांच की केस डायरी भी अदालत के सुपुर्द की जाएगी।
वहीं यौन उत्पीडन मामले में सह आरोपी और आसाराम के रसोईए शरदचंद की तरफ से दाखिल अग्रिम जमानत की याचिका गुरुवार को वापस
ले ली गई। जेल में बंद आसाराम की ओर से जेल में महिला वैध की सेवाएं देने को लेकर लिखे गए पत्र पर भी गुरुवार को सुनवाई टल गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई जिला एंव सेशन कोर्ट में २४ सितंबर को होगी। नाबालिग से यौन शोषण के मामले में आसाराम का साथ देने के आरोप में पुलिस को शिल्पी की तलाश है। पुलिस शिल्पी से पूछताछ करना चाहती है। आरोप है कि शिल्पी ने ही पीड़ित को फोनकर आश्रम में बुलाया था।
दूसरी ओर आसाराम मामले की सीबीआई जांच को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। गौरतलब है कि आसाराम की जमानत याचिका निचली अदालत में खारिज हो चुकी है और ऊपरी अदालत में उन्होंने अभी तक अपील नहीं की है।

 

  • आसाराम का जबलपुर और छिंदवाडा आश्रम भी अवैध

शिकायतों की जांच में प्रशासन तेजी से जुटा
जबलपुर । नाबालिग लड़की से यौन शोषण के आरोपों में घिरे संत आशाराम बापू की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। उनके जेल में जाने के बाद उनकी परत दर परत खुलती जा रही है। देश के कई राज्यों में चल रहे उनके आश्रमों पर बुल्डोजर चल चुका है, अब जबलपुर और छिंदवाड़ा का आश्रम भी प्रशासन के निशाने पर है। जन सुनवाई में हुई शिकायत के बाद जिला कलैक्टर विवेक पोरवाल ने जबलपुर के लम्हेटाघाट रोड पर चौकीताल स्थित बापू के आश्रम की जमीन का सीमांकन और नापजोख कराने के आदेश दिये। साथ ही भेड़ाघाट नगर पंचायत, सीएमओ को इस पर संज्ञान लेने के निर्देश दिये। कहा जा रहा है कि छिंदवाड़ा और चौकीताल के आश्रम भी अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाये गये हैं।
इस बारे में कलेक्टर विवेक पोरवाल का कहना है कि राजस्व अमले को भूमि की जांच कर सीमांकन करने और दस्तावेजों का परीक्षण करने के निर्देश दिये गये। अवैध पाये जाने पर आश्रम को खाली कराने की कार्यवाही की जाएगी। उधर भेड़ाघाट नगर पंचायत द्वारा भी चौकीताल आश्रम के खिलाफ कार्यवाही तेज कर दी गई है। संभव है कि बहुत जल्द इस आश्रम पर भी बुल्डोजर चलेगा। इस बीच िंछदवाड़ा से मिली खबरों के मुताबिक बापू के छिंदवाड़ा में चल रहे आश्रम भी अवैध हैं। छिंदवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा भी आश्रम के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। छिंदवाड़ा आश्रम में विगत वर्षों में तीन बच्चों की मौत हुई थी। इसको लेकर आश्रम विवादों में घिरा था। इसी प्रकार जबलपुर आश्रम में रहने वाले एक युवक की उस समय संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी, जब बापू का जबलपुर प्रवास हुआ था। मृतक छात्र के परिजनों ने बापू पर जहर देकर बच्चे को मारने का आरोप लगाया था। इस तरह से विवादों का साया बापू के साथ लंबे समय से चलता रहा। लेकिन उनके हाई प्रोफाईल संबंधों के कारण उन पर कार्यवाही नहीं करता रहा। यौन शोषण के मामले में बापू पर शिवंâजा कसने के बाद अब एक के बाद एक उनकी परतें खुल रहीं हैं।

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